Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Prithvi ka bhavishya by Jayshree birmi

 पृथ्वी का भविष्य  हमारे पुराणों और ग्रंथों  में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर जो भी प्रलय हुए हैं उसके बारे …


 पृथ्वी का भविष्य

Prithvi ka bhavishya by Jayshree birmi

 हमारे पुराणों और ग्रंथों  में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर जो भी प्रलय हुए हैं उसके बारे में विस्तार से लिखा हुआ हैं।और सभी प्रलय के समय भगवान विष्णु ने आकर कुछ लोगों को बचाया और फिर पृथ्वी पर जन जीवन चलायमान हुआ।ऐसे प्रलयों के बाद भी उत्क्रांतिया हुई लोग नए नए अविष्कार करते गए और जीवन में सहूलियतों के साथ प्रगति भी होती गई।एक समय में आदमी को जीवनयापन के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी लेकिन अब मशीनें आने से शारीरिक श्रम कम हो गया हैं लेकिन मानसिक व्यथाएं बढ़ती जा रही हैं। मशीनें आने से जीवन तो सरल हो गया लेकिन युद्ध सामग्रियां बढ़ने लगी हैं,तीर और तलवार से लड़ते लोगों को बंदूक और तोप मिली तो लड़ाई व्यापक रूप से होने लगी।पहले लड़ाइयां सिर्फ रणभूमि में ही लड़ी जाती थी लेकिन बाद में शहर और बस्तियों पर भी हमले होने लगे।और फिर तो हवाई जहाज पर सफर  को तो छोड़ो लड़ाइयां होने लगी,बम फेंक ने के लिए हवाई जहाजों का उपयोग होने लगा।विज्ञान की हरेक खोज का उपयोग आयुध के रूप में मानव करने लगा।आज सोच के बाहर के आयुध सुनने को मिलते हैं जिनके नाम हमने यूएसए ने जब अफगानिस्तान छोड़ा तब सुने थे। देखें तो दो प्रकार के हथियार होते हैं एक तो घातक हथियार और दूसरे उन्हे ढोने के लिए बने हथियार।जैसे रॉकेट घातक हैं तो उसे ढोने के लिए हवाई जहाज या पानी का जहाज जो उनकी उपयुक्ती   और क्षमता के हिसाब  अनुसार चयन किए जाते हैं।रायफल, मशीनगन, मोर्टार,ग्रेनेड ,लॉन्चर के साथ और पता नहीं क्या क्या।लेकिन सबसे खतरनाक हैं न्यूक्लियर बॉम्ब जो पृथ्वी को तहसनहस करके ही छोड़ेगा।जीतने न्यूक्लियर बॉम हैं जिसके पास वह उतना ही शक्तिवान देश गिना जाता हैं और शक्तिवान बनने की होड़ में सभी देश अपने देश की उन्नति को छोड़ शास्त्र दौड़ में शामिल होने के लिए कटिबद्ध हो रहे हैं ,इस दौड़ का अंजाम तो सिर्फ भविष्य ही बताएगा।जो सारे देश हजारों की संख्या में न्यूक्लियर बम के मालिक हैं वही तो ताकतवर देश हैं और जिनके इशारों पर दूसरे देशों को चलना पड़ता हैं।

  महाभारत तो अपने जमाने के विश्वयुद्ध  से कम नहीं था।प्रथम विश्वयुद्ध १९१४ से १९१८ तक और १९३९ से१९४५ तक द्वितीय विश्व युद्ध चला लेकिन सब से बड़ा युद्ध शीत युद्ध था यूएसए और सोवियत यूनियन के बीच  १९४५ से१९९१ तक चला, जब तक रशिया का १५ देशों में विभाजन नहीं हो गया।जिसमे दुनियां में सिर्फ विनाश ही विनाश  देखने को मिला और अब यहीं हाल यूएसए और चीन के बीच शुरू हो रहा हैं, युद्ध हो या न हो उसका डर तो बना ही रहेगा।चीन का ताइवान के साथ जो राजकीय तनाव हैं वह चिंता का विषय हैं।अजरबैजन और आर्मेनिया में जो युद्ध हुआ वह भी घातक था जिसमे  दोनों ओर से हजारों लोग मरे  और उतने ही घर और मिलकतों का नुकसान हुआ। दोनों देशों में सीमा विवाद के चलते जनता के अनुरोध पर युद्ध हुआ था।पहली बार इन दोनों में युद्ध दो साल तक युद्ध चला था,१० लाख लोग बेघर हुए थे और ३०००० लोग मरे गए थे।

 वैसे इजराइल और पेलेस्टाइन का युद्ध हुआ जिसमें रॉकेट आदि के हमलों में सैकड़ों लोगों की जान गई जिसमे ५७ सदस्यों के इस्लामिक  संगठन ने फिलिस्तान के खिलाफ इजराइल की कार्यवाही का विरोध किया।और तो और अपने देश ने भी इन ७५ सालों में ५ सीधे युद्ध और कितने ही परोक्ष युद्धों का सामना किया हैं।

  अब ये हथियारों से भी ज्यादा घातक रासायनिक और जैविक हथियार हैं जो अघोषित युद्ध ही हैं अपने सैनिकों को मारे बिना ही दुश्मनों को  नष्ट करने का आसन तरीका।जो नैतिकता से कोसों दूर की तकनीक हैं। दुनियां का नाश करके क्या राज कर पाएगा कोई ये सोच क्यों नहीं आती उन क्रूर शासकों को? किसके उपर राज्य करेंगे ऐसे लोग? अभी अभी देखें तो अफगानिस्तान के जीते हुए तालिबानों का राज्य एक  जनून के तहत प्राप्त सत्ता को वहशियत से चला रहे आतंकी राज्य के अलावा क्या कहेंगे उसे? खाने पीने की किल्लतो के बीच जी रहें हैं लोग।सोशल मीडिया पर देखे हुए चित्र, जिसमे हवाई जहाज में चढ़े लोग जो उतरने के लिए तैयार नहीं थे ,कइयों की तो गिरने से जानें भी गई,क्या कभी भुला पाएगी दुनियां इन चित्रों को जो आंखो से दूर नही हो रहें।क्यों होते ये युद्ध ! कुछ लोगों की गैरवाजीब  तमन्नाये पूरी करने के लिए?

  दूसरे जो अभी खाद्यान्न की कमी जो दुनियां को भुखमरी के कगार पर ले जा रही हैं।जिसमे पाकिस्तान में तो इतनी तंग परिस्थितियां हैं की हर चीज महंगी होती जा रही हैं। संग्रहित चीनी  तो ६ महीने में खत्म हो जाएगी और आटे का भाव भी आसमान छू रहा हैं जिस से जनजीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा हैं।बदहाली में आटा गीला , जैसे हालात अफगानिस्तान की वजह से हुए हैं पाकिस्तान के,वहां के हालात तो बद से भी बदतर हैं। अफगानिस्तान में तो लोग खाने का सामान खरीद ने के लिए अपना सर समान बेच रहे हैं क्योंकि वहां तो जब से तालिबानियों ने फतेह की हैं तब से ही हालत बिगड़े हुए हैं।खाने पीने की चीजे की निर्यात पर पाकिस्तान द्वारा रोक लगने से और भी खराब परिस्थितियां हो रही हैं।निर्यात पर रोक की वजह से वहां से स्मगल हो के चीजे सरहद पार अफगानिस्तान में आ जाती हैं जो अति महंगी बिक रही हैं और उधर पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। वैसे ही नॉर्थ कोरिया में भी वही हालत हैं।वहां भी खाद्य पदार्थों का आपातकालीन स्थिति जैसा ही हैं खाद्य पदार्थ की कीमतें हजारों में हो गई हैं।प्रेसिडेंट ने भी इस परिस्थियों को स्वीकार कर लोगों को कम खाने की दरख्वास्त की हैं।ये हालत काफी लंबे समय से चल रहें हैं किंतु करोना काल में चिंताएं और बढ़ गई हैं।नॉर्थ कोरिया में तो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध,राजकीय गेरव्यावस्था,कुदरत की मार और सब से ज्यादा कॉविड १९ के समय में सख्त लॉक डाउन में सरहदों को बंद करना आदि का समावेश होता हैं।सबसे ज्यादा राजकीय कोष का परमाणु शस्त्रों के उत्पाद में खर्च करना भी कह सकते हैं।

  चीन  में भी खाद्यान्न के संग्रह की सूचना दी गई हैं ।वैसे भी चीन में खाद्यान्न उत्पादों में कमी के असर कभी से दिख रहें हैं।वैसे चीन के समाचार जल्दी बाहर नहीं आते हैं।वैसे भी दुनियां में महंगाई बढ़ी हुई हैं कोई भी देश ऐसा नहीं हैं जहां सभी जरूरतों के समान की कीमतों में इजाफा न हुआ हो! अपने देश में भी वही हाल हैं।अभी ये हाल हैं तो भविष्य में क्या होगा यह भी प्रश्न हैं।

उपर से ग्लोबल वार्मिंग से को बदलाव आ रहे हैं वह भी दुनियां के लिए नकारात्मक परिस्थितियां ही लायेंगे।कुदरती प्रकोप भी तो हर जगह देखने मिल रहा हैं।कई भू स्खलन तो कही बे मौसमी बारिश और बाढ़ तो कही सुखा दिख रहा हैं।

   वैज्ञानिकों की ब्रह्मांड की जिज्ञासा भी तो दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं।चांद,मंगल ,शुक्र आदि ग्रहों पर जा वहा के जलवायु के संशोधन कर वहां के कुदरती भंडारों का जायजा लेना आदि तक तो ठीक हैं किंतु पर ग्रह में जीवों के अस्तित्व को खोजना पूरी पृथ्वी के लिए एक ओर मुसीबत बन सकती हैं।पृथ्वी के वासी ही आपस में शांति से नहीं जी रहे हैं वहां पर ग्रह वासियों का कैसा व्यवहार होगा ये भी प्रश्न ही हैं।

क्या होगा पृथ्वी का भविष्य ये तो अपने ही हाथ में हैं।अविष्कारों में ध्वंस करने वाले आयुधों के बदले प्रगति करने वाली मशीनें बनानी होगी।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र

April 30, 2022

देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र किसान भागीदारी, प्राथमिकता हमारी और नवोन्वेषी कृषि अभियान सहित कृषि विकासोन्मुख अभियानों को युद्ध स्तर

राष्ट्रीय पंचायती राज़ दिवस 24 अप्रैल 2022 पर विशेष

April 27, 2022

राष्ट्रीय पंचायती राज़ दिवस 24 अप्रैल 2022 पर विशेष भारत के किसी हिस्से में पहली बार कार्बन न्यूट्रल पंचायत होगी,

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2022 वर्चुअल मनाया गया

April 27, 2022

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2022 वर्चुअल मनाया गया भारत का बौद्धिक संपदा में हर साल बेहतर प्रदर्शन हो रहा है

दुनियां का मंच – भारत सरपंच

April 27, 2022

दुनियां का मंच – भारत सरपंच भारत एक नए वैश्विक उच्च शक्ति के रूप में वैश्विक पटल पर उभर रहा

पत्रकारिता एक मिशन

April 27, 2022

पत्रकारिता एक मिशन लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने एक स्वतंत्र, बंधन मुक्त, मज़बूत और जीवंत मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान

बुलडोज़र पर घमासान!!

April 27, 2022

बुलडोज़र पर घमासान!! बुलडोज़र पर मचे सियासी घमासान के बीच छठवीं बुलडोजर फैक्ट्री का उद्घाटन ब्रिटेन के पीएम ने किया

Leave a Comment