Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Premchandra ki jayanti vishesh by Sudhir Srivastava

 जयंती पर विशेष     मुंशी प्रेमचंद लमही बनारस में 31जुलाई 1880 को जन्में अजायबराय आनंदी देवी सुत प्रेम चंद। धनपतराय …


 जयंती पर विशेष     
मुंशी प्रेमचंद

Premchandra ki jayanti vishesh by Sudhir Srivastava

लमही बनारस में

31जुलाई 1880 को जन्में

अजायबराय आनंदी देवी सुत प्रेम चंद।

धनपतराय नाम था उनका

लेखन का नाम नवाबराय।

हिंदी, उर्दू,फारसी के ज्ञाता

शिक्षक, चिंतक, विचारक, संपादक

कथाकार,, उपन्यासकार 

बहुमुखी ,संवेदनशील मुंशी प्रेमचंद

सामाजिक कुरीतियों से चिंतित

अंधविश्वासी परम्पराओं से बेचैन

लेखन को हथियार बना

परिवर्तन की राह पर चले,

समाज का निचला तबका हो

या समाज में फैली बुराइयाँ

पैनी निगाहों से देखा समझा

कलम चलाई तो जैसे

पात्र हो या समस्या

सब जीवंत सा होता,

जो भी पढ़ा उसे अपना ही

किस्सा लगा,

या अपने आसपास होता

महसूस करता,

उनका लेखन यथार्थ बोध कराता

समाज को आइना दिखाता,

शालीनता के साथ कचोटता

चिंतन को विवश करता

शब्दभावों से राह भी दिखाता।

अनेकों कहानियां, उपन्यास लिखे

सब में कुछ न कुछ समस्या

उजागर कर अपना स्वर दिया,

लेखन से जागरूकता का

जन जागरण किए।

‘सोजे वतन’ चर्चित हुई

मगर नबाब छिन गया,

गरीबों के हित चिंतक

महिलाओं के उद्धारक

मुंशी प्रेमचंद नया नाम

‘पंच परमेश्वर’ से आया।

गबन, गोदान, निर्मला

कर्मभूमि ,सेवासदन लिख

उपन्यास सम्राट हुए,

चर्चित कहानियों में

‘सवा सेर गेहूँ’ की 

‘गुप्त धन’ सी तलाश में

‘ठाकुर के कुएँ’ के पास

‘बड़े घर की बेटी’

‘बूढ़ी काकी’ और 

‘नमक का दरोगा’ के सामने

 ‘पूस की रात’

‘ईदगाह’ के मैदान में

ये ‘शतरंज का खिलाड़ी’

‘कफन’ की चादर ओढ़

8 अक्टूबर 1939 को 

दुनिया को अलविदा कह गया,

परंतु अपनी अमिट छाप

धरा पर छोड़ गया,

मुंशी प्रेमचंद नाम 

सदा सदा के लिए 

अमर कर गया।

👉 सुधीर श्रीवास्तव

         गोण्डा, उ.प्र.

      8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

मेरी शब्दों की वैणी

September 4, 2022

मेरी शब्दों की वैणी यादों के भंवर में डूब कर मैं अकसर मोतियन से शब्द लातीबगिया शब्दों कि मेरी जहां

गुरुवर जलते दीप से(शिक्षक दिवस विशेष)

September 4, 2022

गुरुवर जलते दीप से दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब

आई पिया की याद..!!

September 1, 2022

आई पिया की याद..!! मन मयूर तन तरुण हुआबरखा नें छेड़े राग।गरज गरज घन बरस रहेआई पिया की याद।। छानी

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन

September 1, 2022

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन नन्हीं सी पीठ पर बस्ते का बोझ हैदब रहा है बचपन लूट

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

September 1, 2022

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो

कविता – मोहन

September 1, 2022

कविता – मोहन मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारीअगाध अनन्त हुई कैसेप्रीत में पागल मीराबाईमन से सन्त हुई कैसे राधा ने

PreviousNext

Leave a Comment