Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Prem pathik by Jitendra Kabir

 प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना …


 प्रेम पथिक

Prem pathik by Jitendra Kabir

एक प्रेम बचपन में हुआ था

पुस्तकों से,

जब भी खोला उन्हें

पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास

और कल्पना की एक अलग दुनिया में,

उनके माध्यम से ही

मैं परिचित हो पाया साहित्य व समाज की

महान विभूतियों के दर्शन से,

मेरे विचारों एवं व्यक्तित्व निर्माण में जिनकी रही है

एक महती भूमिका,

आज भी सबसे ज्यादा

सकून पाता हूं मैं उनकी ही शरण में जाकर,

आज भी कायम है

मेरा वो प्रेम पुस्तकों से बचपन की तरह निश्छल।

एक प्रेम अब हुआ है इस उम्र में

तुमसे,

जब भी देखा तुम्हें दिल धड़क गया जोरों से,

सोचा तुम्हें तो

ख्वाब बुन डाले सुहाने कई,

लिखा जो कभी

तो रंग दिए प्रेम से आसमान कई,

मेरी बेचैनियां सकून 

पाती हैं तेरे ख्यालों में अक्सर

और मेरी खुशियां

मांगती हैं तेरी मौजूदगी जिंदगी में अद्यतन।

                                        जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Kavita-पति को भी इंसान मानो

September 18, 2023

पति को भी इंसान मानो उसके कंधे है इतने मजबूतवह सारी दुनिया को उठा लेगा तुम एक सुख दे कर

अनगिनत नाम दे कर

September 18, 2023

अनगिनत नाम दे कर मेरे दिल की धड़कनें धड़क कुछ कहती,मेरी सांसें थम-थम चलती ही रहती।गौर से सुना अपनी सॉंसों,

राष्ट्रभाषा या राजभाषा | rashtrabhasha ya rajbhasha

September 16, 2023

राष्ट्रभाषा या राजभाषा अपने ही देश में दिवस मनवाने की मोहताज़ हूँ,विवश हूँ मैं..राष्ट्रभाषा हूँ या राजभाषा हूँ,आज भी इस

तुम ही मेरा सब कुछ-दिकु

September 16, 2023

 तुम ही मेरा सब कुछ-दिकु सुनो दिकु…… एक आसएक विश्वासतुम से है सिर्फ एक मिलन की प्यास चाहूं सिर्फ ख्वाब

शहीदों की कुर्बानी | shaheedon par kavita

September 16, 2023

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में  दिनांक 13 सितंबर 2023 को आतंकियों ने भारतीय सेना के उच्च अधिकारी जवानों पर हमला कर

हमारी हिन्दी |kavita -hamari hindi

September 14, 2023

हमारी हिन्दी |kavita -hamari hindi है विरासत हमारी यह हिन्दीहींग्लीश रह गई बेचारी हिन्दी विमुख रही अपनों के मुख से

PreviousNext

Leave a Comment