Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Pratiksha by Anita Sharma

 प्रतीक्षा तुम्हारे आने की प्रतीक्षा और बेसब्री, एक-एक दिन गिन-गिनकर कटता है। * उतावलापन और बढ़ती प्रतीक्षा, कितनी बेचैनी कितनी …


 प्रतीक्षा

Pratiksha by Anita Sharma

तुम्हारे आने की प्रतीक्षा और बेसब्री,

एक-एक दिन गिन-गिनकर कटता है।

*

उतावलापन और बढ़ती प्रतीक्षा,

कितनी बेचैनी कितनी उत्सुकता।

*

अपार हर्ष और खुशियाँ अपने अंतस में,

पुलकित हृदय प्रतीक्षा में रत्।

*

न जाने कितने ख्वाब हैं आखों में,

कितनी बातें हैं मन में ।

*

कितनी आशायें जग उठती हैं,

कितनी तमन्नाये और अपेक्षाऐ।

*

हर घड़ी मन प्रतीक्षा में रत्,

हलचल बेसब्री और प्रतीक्षा।।

*अनिता शर्मा झाँसी
*मौलिक रचना


Related Posts

अब भी हिम्मत बाकी है!

August 5, 2022

अब भी हिम्मत बाकी है! मुसीबतों का भंडार है,हर तकलीफ का संहार है,अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,दृढ़ता तेरा

जाने के बाद।

August 5, 2022

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना।

मन मेरा पुकारे…….

August 5, 2022

मन मेरा पुकारे……. मन मेरा पुकारे काना प्यारेकहाँ है ढिकाना हमको बता देकरनी है बातें तुझ से कब से हम

शीर्षक : लड़की और समाज

August 5, 2022

शीर्षक : लड़की और समाज लड़की का जीवनसिमटकर रह जाता है ,चौखट , चूल्हे , चौके तक । जन्म के

आज भी वो दिन हमको याद है

August 5, 2022

याद है वो दिन आज भी आज भी वो दिन हमको याद हैसर पर हमारे मोहब्बत ए ताज हैआज सीने

हजार है!/hazar hai

August 5, 2022

 हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है!

PreviousNext

Leave a Comment