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Pratiksha by Anita Sharma

 प्रतीक्षा तुम्हारे आने की प्रतीक्षा और बेसब्री, एक-एक दिन गिन-गिनकर कटता है। * उतावलापन और बढ़ती प्रतीक्षा, कितनी बेचैनी कितनी …


 प्रतीक्षा

Pratiksha by Anita Sharma

तुम्हारे आने की प्रतीक्षा और बेसब्री,

एक-एक दिन गिन-गिनकर कटता है।

*

उतावलापन और बढ़ती प्रतीक्षा,

कितनी बेचैनी कितनी उत्सुकता।

*

अपार हर्ष और खुशियाँ अपने अंतस में,

पुलकित हृदय प्रतीक्षा में रत्।

*

न जाने कितने ख्वाब हैं आखों में,

कितनी बातें हैं मन में ।

*

कितनी आशायें जग उठती हैं,

कितनी तमन्नाये और अपेक्षाऐ।

*

हर घड़ी मन प्रतीक्षा में रत्,

हलचल बेसब्री और प्रतीक्षा।।

*अनिता शर्मा झाँसी
*मौलिक रचना


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