Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Prathana by Jay shree birmi

 प्रार्थना न दे दर्द इतना कि सह न सकूं मैं मेरे दाता संभालना तो तुझ ही को हैं झमेले मेरे …


 प्रार्थना

Prathana by Jay shree birmi

न दे दर्द इतना कि सह न सकूं मैं

मेरे दाता संभालना तो तुझ ही को हैं झमेले मेरे

भुला दे सब दोष मेरे बिनती हैं ये

न तैर पाऊंगी अब ये दुःख का दरिया

बहुत तैर चुकी हूं रवां – ए– मौजों के खिलाफ

थक चुकी हु हार चुकी 

तेरी खौफ–ए– दुनियां से

या तो मुक्ति दिला या बदल दे तेरी लिखी तकदीर को

अब तो समझ अपनों के दर्द और दिखा दे रेहम 

तबदीर और तकदीर दोनों के अमल में

न हारी हूं पर जीती भी नहीं लिखी तूने तकदीर  जो संसार में

 हंस कर तुम सर माथे पे हैं लगाया 

किंतु अब दे दी हैं तेरे ही हाथों में पतवार

न सुख में सोचा न दुःख में सोचा

हर हालत को अपनाया हैं

अब बहुत हुआ हैं नारायण अब

क्या मैं कह दूं ये”अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल”

हा कह दे या आजा अब

नैया पार लगाने को

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

इन्सानियत के पक्ष में- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

इन्सानियत के पक्ष मे क्या तुम सीखना चाहते होखुद कई दिन भूखे रहकरअनाज की कीमत समझना? खुद पर कोई जुल्म

अश्रु- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

अश्रु बहते है अश्क ही आंखो के द्वार सेखुशी हो तो भी बहेंगे येगम में तो बहने का दस्तूर ही

हालात- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

हालात मिलाना हाथ मुश्किल हैं बहुतगले लगाने की बात ही न कीजिएघूमने की ख्वाहिश बहुत हैंमगर बाहर निकलने की बात

एक अभिशाप- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

एक अभिशाप एक तरफ हैं…घर में बेटी के जन्म लेने परमायूस होने वाले लोग,लेकिन बेटे के जन्म परपूरे गांव, रिश्तेदारी

शेखियां बघारने का मौसम- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

शेखियां बघारने का मौसम चुनाव आ गये हैं और अब… देश को तरक्की की राह परले जाएगा कोई,तो कोई यहां

स्वामी विवेकानन्द – डॉ. इन्दु कुमारी

January 15, 2022

स्वामी विवेकानन्द युवाओं के प्रेरणा स्रौत शांति के संवाहक संतदेशभक्त समाज हितैषीलक्ष्य पाकर न रुके कदम भारतीयों के आदर्श हैंआध्यात्मिक

Leave a Comment