Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Pran priye kavya by salil saroj

 प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित  कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय  1 …


 प्राण-प्रिय

Pran priye kavya by salil saroj

अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय

केशों में आलोकित सांध्य मधुमय

चिर- प्रफुल्लित  कोमल किसलय

दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय  1

दृगों से प्रवाहित होता रहता हाला

वो मेरी मधुकलश वोही मधुशाला

मृग- पदों से कुचालें भरती  बाला

प्राण – घटकों की उष्मित दुःशला  2

ब्रह्माण्ड की नव- नूतन कोमल  काया

मरूभूमि में आच्छादित शीतल  छाया

व्योम की मस्तक पर आह्लादित माया

मनभावन  मुस्कान  की  वो  सरमाया 3

विटपों के अंगों पर जैसे  कोई चित्रकारी

वायु के बाहुबलों पर द्रुत वेग की सवारी

चहुँ दिशाओं की वो एक-मात्र पैरोकारी

वो ही रम्भा -मेनका, वो ही फूल कुमारी  4

भाव-भंगिमा में देवी का अवतरण

कवि के कविता का नया संस्मरण

किसी किताब  का प्रथम  उद्धरण

जिस्म से जवान, ख्यालों से बचपन  5

जो भी शांतचित्त हो देख ले, विस्मित हो जाए

इहलोक में विलीन हो जाए ,  चकित हो जाए

खड़ी बोली से देवों की बोली संस्कृत हो जाए

किसी देवालय के प्रांगण  सा झंकृत  हो जाए  6

उसके आगमन से जीवन में इष्ट पा लिया

अपने उपेक्षित मन का परिशिष्ट पा लिया

किसी अरुंधति ने अपना वशिष्ठ पा लिया

मूक अक्षरों ने साकार होता पृष्ठ पा लिया  7

तुम्हारे होने से अपने सुकर्मों का ज्ञान हुआ

शील  और सौम्य परिणति का प्रमाण हुआ

साधारण जीवात्मा सा जीव,  मैं महान हुआ

असफलता से  सफलता  का  सोपान हुआ  8

शीश झुका का प्रतिदिन ईश-वंदन करता हूँ

अवतरित महिमा  का  अभिनन्दन  करता हूँ

इस अनुकम्पा का बारम्बार भंजन करता  हूँ

मेरी प्राण-प्रिय, तुम्हारा अनुनन्दन करता  हूँ  9

मेरे सजीव  होने का  अनुपम  आधार हो तुम

मैं जिस मंझधार में था,उसकी पतवार हो तुम

मैं तो बस लेश्मात्र हूँ,मेरा सारा संसार हो तुम

हे प्राण-प्रिय,मेरी जीवटता का आह्वान हो तुम  10

सलिल सरोज

कार्यकारी अधिकारी

लोक सभा सचिवालय

संसद भवन

नई दिल्ली


Related Posts

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

Leave a Comment