Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

Pita par kavita | kavita:pita ek ummid ek aas hai

पिता एक उम्मीद एक आस है पिता ज़मीर पिता जागीर है पिता ईश्वर अल्लाह का ही एक रूप है जिसके …


पिता एक उम्मीद एक आस है

Pita par kavita | kavita:pita ek ummid ek aas hai

पिता ज़मीर पिता जागीर है
पिता ईश्वर अल्लाह का ही एक रूप है
जिसके पास पिता है
उसकी तकदीर बुलंद है

पिता परिवार की अग्रणी आस है
जिंदगी में पिता का ओहदा खास है
परिवार का खास प्यारा बॉस है
पिता एक उम्मीद एक आस है

पिता जिम्मेदारियों की गाड़ी से
लदा हुआ खास सारथी है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला
हमदर्द साया और बिछौना है

पिता हमारे सपनों को पूरा
करने वाली हमारी प्यारी जान है
जग में कहने को एक बात है
पिता मां और बच्चों की पहचान है

जो पिता का अपमान करते हैं
वह जीव घोर अन्यायी और पापी है
कंस दैत्य और रावण की कॉपी हैं
परंतु धन्य पिता उनके लबों पर हमेशा माफ़ी है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

Gandhi ek soch by mahesh ojha

October 12, 2021

गांधी : एक सोच अटल विश्वास शान्ति प्रेम क्षमा और सत्य के मूरत, कहा सुभाष ने बापू जिन्हें अपने सम्बोधन

Bas ek sawal by Jitendra Kabir

October 12, 2021

 बस एक सवाल वैसे तो इस देश में काफी खराब हैं सड़कों के हालात, खराब सड़कों के कारण  होती हैं

Hamne kab kaha by vijay Lakshmi Pandey

October 12, 2021

 हमनें कब कहा….??? हमनें   कब   कहा…? ये हड्डियां कमज़ोर  हो गई । लोगों   नें    बताया   , हड्डियां बूढ़ी हो

Vishwa Dak Divas per Vishesh by Sudhir Srivastava

October 12, 2021

 विश्व डाक दिवस पर विशेष खतों की यादें अचानक एक दिन पुराने खत दिखे तो बीते दिनों की याद ताजा

Suturmurgi pravitti by Jitendra Kabir

October 8, 2021

 शुतुरमुर्गी प्रवृत्ति अगर तुम कहते हो कि ‘साहित्य रचना’ को मुक्त रखा जाए सर्वथा वर्तमान ‘सामाजिक-राजनैतिक सरोकारों’ से, सत्ता के

Man ki bat by Anita Sharma

October 7, 2021

 “मन की बात” मन की बातें मन में ही रखती है नारी। बाहर निकल शब्द भूचाल बचाये। कब सोचा था

Leave a Comment