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Chandra Prakash Gautam, poem

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

 ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के …


 ग़ज़ल

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना है
रोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है

समय के अभाव में गमों के ढेर में
आखिर कब तक जिंदगी बिताना है

खेत खलियान में उछल कूद खूब मचाई है
उस उछल कूद को अब दोहराना है

झूठ के ढेर में सच दबता जा रहा है
सच सच क्या है लोगों तक पहुंचाना है

सोने वाले को जगाना है रोने वाले को हंसाना है
पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना है

कवि सी.पी. गौतम

In Hinglish

peele peele phoolon me ab jakar gungunana hai

rone wale ko hasana hai sone wale ko jagana hai


samay ke abhav me gamon ke dher me

akhir kab tak zindagi bitana hai


khet khaliyan me uchhal kood khub machai hai

us uchhal kood ko ab dohrana hai


jhooth ke dher me sach  dabta ja raha hai

sach sach kya hai logo tak pahuchana hai


sone wale ko jagana hai rone wale ko hasana hai

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

                                    kavi c.p. gautam


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