Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Chandra Prakash Gautam, poem

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

 ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के …


 ग़ज़ल

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना है
रोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है

समय के अभाव में गमों के ढेर में
आखिर कब तक जिंदगी बिताना है

खेत खलियान में उछल कूद खूब मचाई है
उस उछल कूद को अब दोहराना है

झूठ के ढेर में सच दबता जा रहा है
सच सच क्या है लोगों तक पहुंचाना है

सोने वाले को जगाना है रोने वाले को हंसाना है
पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना है

कवि सी.पी. गौतम

In Hinglish

peele peele phoolon me ab jakar gungunana hai

rone wale ko hasana hai sone wale ko jagana hai


samay ke abhav me gamon ke dher me

akhir kab tak zindagi bitana hai


khet khaliyan me uchhal kood khub machai hai

us uchhal kood ko ab dohrana hai


jhooth ke dher me sach  dabta ja raha hai

sach sach kya hai logo tak pahuchana hai


sone wale ko jagana hai rone wale ko hasana hai

Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai

                                    kavi c.p. gautam


Related Posts

क्रिसमस-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 25, 2021

क्रिसमस! क्रिसमस है  एक प्रसिद्ध त्योहार, सैंटा क्लॉस जी का हर बच्चा करता है इंतजार, 25 दिसंबर को मनाया जाता

तुम देना साथ सदा-नंदिनी लहेजा

December 23, 2021

तुम देना साथ सदा। नन्हा सा अंकुर बन जब, मैं मातृगर्भ में आया। मेरे अस्तित्व को सींचा माँ ने, था

ठिठुरता ठंड – डॉ इंदु कुमारी

December 23, 2021

ठिठुरता ठंड कंपकपाती ये रातें सिसकती रही यादेंठिठुरते हुए ठंड की बीत गयी रे बचपनआ गयी बर्फीली सीजर्रा -जर्रा हिलानेथरथराती

मशवरा- R.S.meena indian

December 23, 2021

मशवरा इशारों में मुझकों बुलाती है,मगर जाने का नही ।अपना उश्शाक बनाती हैं,उधर जाने का नही ।। इश्क़ में खो

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी- सुधीर श्रीवास्तव

December 23, 2021

 पुण्य तिथि विशेषआचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी दौलतपुर ग्राम रायबरेली जनपद मे पाँच मई अठारह सौ चौसठ मेंपं. रामसहाय द्विवेदी के

कविता-नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 23, 2021

नई शुरुआत! सब बिखर गया तो क्या हुआ,समेटने का दम रखते हैं,चलो करे नई शुरुआत,जिंदगी में फिर से नई शुरूवात

Leave a Comment