Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

peedhiyon ka antar by Jitendra Kabir

 पीढ़ियों का अंतर बच्चे! वर्तमान में जीना  चाहते हैं अपने बाल मन के कारण, इसलिए मौका मिलता है जब भी …


 पीढ़ियों का अंतर

peedhiyon ka antar by Jitendra Kabir

बच्चे!

वर्तमान में जीना 

चाहते हैं

अपने बाल मन के कारण,

इसलिए मौका मिलता

है जब भी

निकल लेते हैं

अपने बाल-सखाओं के साथ

मस्ती मारने के लिए,

मां-बाप!

भविष्य की सोच

रखते हैं

अपने सयानेपन के कारण,

इसलिए हर समय डांटते हैं 

बच्चों को

पढ़ाई न करने के लिए।

अपने बच्चों के भाग्य-विधाता

बनने की धुन में

भूल जाते हैं वो

कि उन्होंने भी

बचपन में अपने मां-बाप की

हर बात नहीं मानी,

मां-बाप जो और जैसा

बनाना चाहते थे उन्हें,

बिल्कुल वैसे ही उनमें से

बहुत लोग न बन पाए,

                 जितेन्द्र ‘कबीर’

                 

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा

June 2, 2021

कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । देख कर

kavita agar chahat hai kabhi kisi ke dil me bus jaane ki

June 2, 2021

 कविता  अगर चाहत है कभी किसी के दिल में बस जाने की, कभी गलती मत करना उसको आजमाने की। अगर

gazal aaj kal shahar me ek fasana sare aam ho gya

June 2, 2021

ग़ज़ल  आजकल शहर में एक फ़साना सरे आम हो गया, जब से यार मेरा सियासी लोगो का गुलाम हो गया 

kavita thahar gyi hai nadi by ajay kumar jha

June 2, 2021

ठहर गई है नदी! मूक क्यों हो कुछ तो कहो कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो ठहरे जल में कंकर उछाल

kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri

June 2, 2021

 कविता..  इस धरा पर औरतें..  हम,  हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी  नहीं   पातीं .. !!  और, आजीवन

kavita ahankar by mosam khan alwar

June 2, 2021

कविता–अहंकार अहंकार एक अंधियारा है,जग में सबसे ये न्यारा है,ऊंच नीच का भेद नहीनित जीवन में ललकारा है।। अहंकार में

Leave a Comment