Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

 पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा …


 पीड़ा खोने की तेरी

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है,

मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा मेरा अब,

टटोल रहा मैं अपने पथ को कितना चलना मेरा,

प्रेम हमारा खोने का क्या  बहुत  मिला है तेरा  ।।

सुख दुख में हम साथ रहे हैं आगे भी तू रहना,

याद तुम्हारी यही बहुत है कश्ती लिए किनारा,

जीवन तो है उसकी  लीला देगा  वही सहारा ,

चल यादों के साथ हमारे थक कर मैं भी आया।।

खोने की पीड़ा किसे न होती मुझे मिला है जितना,

संतोष बहुत है अतीत तुम्हारा लेकर घर में आया ,

दूर बहुत हैं तुमसे लेकिन मिलने की अभिलाषा ,

आशा पर  ही टिकी हुई  है अपनी दुनिया सारी ।।

मधुर गीत हैं जितने मेरे दर्द उसी में हैं तेरे ,

छलक पड़े हैं हर गीतों में विरह वेदना मेरी,

मंजिल मेरी दूर पड़ी है मिलकर कुछ तो गाएं,

कट जाएंगे जीवन के छन दर्द  न होगा कम  ।।

देख निराली दुनिया अपनी बहुत विवश हूं आज,

न छेड़ो स्वर के सरगम को, सप्तक सारे सोय है,

ध्वनि मेरी इसी में है सारे गीत नगमें भी इसी में हैं,

छेड़ोगे सुनाएंगे ये सारे गीत जीवन के जो प्यारे हैं ।।

तत्वज्ञान है गीता का, अंत नहीं है इच्छा की,

इच्छाएं ही कारण  हैं  मानव मन बेचैनी का,

भोगवृत्ति से छुटकारे का योग वृत्ति साधन है,

तत्वज्ञान अभ्यास से अज्ञान हमारा टूटेगा ।।

चिंतन मय जीवन में संयम अभ्यास जरूरी ,

संयम मय जीवन में विवेक हमारा साथी हो,

ज्ञान और वैराग्य पर चिंतन मेरा अपना हो,

संयम  खो जाने पर समस्या अपनी बढ़ती है।।

गीता दर्शन अविनाशी का संदेश सदा मिला है,

निस्वार्थ कर्म पर चलने वाला ही सच्चा सन्यासी,

जीवन के हर तत्व मिले हैं गीता  दर्शन के अंदर ,

अन्यायी से  लड़ने का हमें समर्थन मिलता है  ।।

मौलिक रचना
                     डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                      बोकारो स्टील सिटी
                        झारखंड।


Related Posts

मीठी जुबान का ऐसा कमाल है

January 19, 2023

मीठी जुबान का ऐसा कमाल है मीठी जुबान का ऐसा कमाल है कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता

जाने क्यों लोग ज़लनखोरी किया करते हैं

January 19, 2023

जाने क्यों लोग ज़लनखोरी किया करते हैं साहित्यकारों लेखकों चिंतको के आर्टिकल छपते हैं गलत नीतियों कामों पर व्यंग्य कसते

zindagi par kavita | बोलती जिंदगी

January 19, 2023

बोलती जिंदगी  बोलती जिंदगी ,मौन होकर के सुन || सप्त स्वर सुन मचलने लगे सब के दिल, किस की पायल

कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता

January 19, 2023

भारतीयता के भाव और कट्टरता  कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़

कविता-सवांद हर समस्या को सुलझाने का मंत्र है

January 15, 2023

कविता-सवांद हर समस्या को सुलझाने का मंत्र है संवाद हर समस्या का उपचार है विश्वास रखोे मिलेगा फ़ल देर सही

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं| mai tumhari Meera hun.

January 15, 2023

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं जहर का कटोरा पीने की हिम्मत हो,तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।अगर प्यार

PreviousNext

Leave a Comment