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patra-mere jeevan sath by sudhir srivastav

पत्र ●●● मेरे जीवन साथी हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास …


पत्र

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मेरे जीवन साथी

patra-mere jeevan sath by sudhir srivastav

हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास कर रहा हूँ।यह सही है कि मुझे गुस्सा कुछ अधिक ही आता है, मैं समझता भी हू्ँ, पर क्या करूँ तुम साथ होती तो शायद कुछ बदलाव हो भी जाता ,पर ये नापाक पाक के समझ में कहाँ आता है?
पाकिस्तान सिर्फ़ हमारे मुल्क का ही नहीं कहीं न कहीं हम दोनों का भी दुश्मन है।वह तो बस जैसे इसी ताक में रहता है कि इधर हम अपनी महरानी के पास पहुंचे और वो बार्डर पर कुछ न कुछ बघेड़ा खड़ा कर दे।हमारा दुर्भाग्य देखो कि जब जब लम्बी छुट्टियां मिली भी ,ये नापाक पाक कबाब में हड्डी बन ही जाता है।मगर तुम निराश मत हो, मैं भी अपनी टुकड़ी के साथ उनकी की नाक में दम करता रहता हूँ।खैर…छोड़ो।
मैं कह नहीं पा रहा हू्ँ फिर भी कोशिश कर रहा हू्ँ।ये अलग बात है कि हम दोनों दाम्पत्य जीवन में इन छःसालों में अधिक साथ नहीं रहे,परंतु तुम्हारे हौसले और जज्बातों की मैं दिल से कद्र करता हू्ँ।तुमने कभी कोई शिकवा शिकायत नहीं की।अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हो।अम्मा बाबा तो तुम्हारी तारीफ के पुल बाँधते नहीं थकते।सच कहूँ तो कभी कभी तुमसे जलन भी होतीं है कि जाने तुमनें कैसा जादू उन पर कर दिया है कि वे अपने बेटे को भी भूल गये हैं।तो गर्व भी होता है तुम पर।इसलिए तो सुकून से रह पाता हूँ कि उन्हें तुम्हें पाकर उन्हें खुशियाँ ही खुशियाँ मिली ।तुम्हारे रूप में वे बेटी के न होने का अहसास भूल गये।
अनेक बाधाओं के बावजूद तुमनें खुद को, बच्चों को ,माँ बाबा को संभाला है,उसके लिए आभार व्यक्त कर तुम्हारा अपमान नहीं करुंगा, पर सच मानों कि तुम्हें अपनीे जीवन संगिनी के रूप में पाकर मैं धन्य हो गया।
जीवन की बगिया में दो नन्हे फूल खिलाकर तुमने मेरे जीवन की बगिया को हराभर कर सुगंध से भर दिया है।
ऐसा लगता है कि इस जन्म में मैं तुम्हारा ऋण शायद ही उतार पाऊँगा।पर यह वादा है कि अगले जन्मों में तुम्हारा कर्जा नहीं रहने दूँगा।
तुम्हें पता है कि प्रेम पत्र जैसा कुछ लिख पाना मेरे वश का रोग नहीं है।और हाँ यह नहीं भूला हूँ कि दुश्मन का शीष लेकर ही अब लौटूँगा।हमारे साथी भी अब दुश्मन की कायराना हरकत से बहुत गुस्से में है।बस अब फिर कभी….।
मां बाबा को प्रणाम कहना, बच्चों को ढेर सारा प्यार,आशीर्वाद।
तुम्हें अपने दिल की गहराइयों में समेटने की कोशिश में तुम्हारा जन्म जन्मांतर का हम सफर…….।
आई लव यू। जय हिंद
◆सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.

©मौलिक, स्वरचित,


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