Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Parwah kaun karen by kalpana kumari

व्यंग्य-कवितापरवाह कौन करे जो स्वत: मिल रहा जीवन में, उसकी परवाह कौन करे। आती सांसे जाती सांसे, सांसो पर जो …


व्यंग्य-कविता
परवाह कौन करे

Parwah kaun karen by kalpana kumari

जो स्वत: मिल रहा जीवन में,

उसकी परवाह कौन करे।

आती सांसे जाती सांसे,
सांसो पर जो जीवन टीका है,
इन आती जाती सांसो की परवाह कौन करे।

पल में उठती पल में गिरती,
आँखों की जो रक्षा करती,
उन उठती गिरती पलकों की परवाह कौन करे।

रक्त-रक्त और मज्जा-मज्जा,
दौड़ लगी है प्राणों की,
इन दौड़ लगाती प्राणों की परवाह कौन करे।

आते लोग जाते लोग,
अटल सत्य जो मृत्यु कहलाती,
निरंतर हो रही मौतों की परवाह कौन करे।

सर्दी जाती गर्मी आती,
गर्मी जाती बारिश आती,
इस बदल रहे मौसम की परवाह कौन करे।

कटते पेड़ मिटती हरियाली,
छँटते जंगल बसते बस्ती,
इस जीवनदायिनी वृक्षों की परवाह कौन करे।

बढ़ते उद्योग बढ़ते प्रदूषण,
दूषित हवा और दूषित जल,
हो रहे प्रदूषित जलवायु की परवाह कौन करे।

घटती उम्र बढ़ती आबादी,
संकट में है भावी पीढ़ी,
हमारी आनेवाली संतानो की परवाह कौन करे।

                                     – कल्पना कुमारी


Related Posts

नगाड़े सत्य के बजे |Nagade satya ke baje

December 11, 2022

 नगाड़े सत्य के बजे बजे झूठ पर तालियां,केवल दिन दो-चार।आखिर होना सत्य ही,सब की जुबां सवार।। सब की जुबां सवार,दौड़ता

मत करिये उपहास | mat kariye uphas

December 10, 2022

मत करिये उपहास अपना बोया ही मिले,या कांटें या घास।बे-मतलब ना बोलिये,मत करिये उपहास। मत करिये उपहास,किसी का जान-बूझकर।निकले हर

भ्रष्टाचार की पोल खोलते रहेंगे| bhrastachar ki pol kholte rahenge

December 10, 2022

 यह  व्यंग्यात्मक कविता वर्तमान में असफ़ल हुए उम्मीदवारों और पार्टी के भाव कविता के माध्यम से प्रस्तुत है। व्यंग्य कविता–भ्रष्टाचार

भारत माँ की पीर| bharat ma ki peer

December 10, 2022

भारत माँ की पीर भारत के गणतंत्र की,ये कैसी है शान ।भूखे को रोटी नहीं,बेघर को पहचान ।। सब धर्मों

Kavita–फितूर| Fitoor

December 10, 2022

कविता : फितूर सुना है बड़े मशहूर हो गए हो,क्या इसलिए इतनी दूर हो गए हो ! हर बात चुभती

अवैध रिश्ते| Awaidh rishte

December 10, 2022

अवैध रिश्ते रिश्तों के दरमियानकुछ दगाबाज पलते जो अपनों को ही अंधेरे में रख हर वक्त छलते।। अवैध रिश्ते कहां

PreviousNext

Leave a Comment