Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

parkota by mainudeen kohri

 परकोटा मैं परकोटा हूँ न जाने कब से खड़ा हूँ मेरा इतिहास बड़ा है मैं कई युद्धों व् योद्धाओं का …


 परकोटा

parkota by mainuddin kohri

मैं परकोटा हूँ

न जाने कब से खड़ा हूँ

मेरा इतिहास बड़ा है

मैं कई युद्धों व् योद्धाओं का प्रत्यक्ष दर्शी हूँ ।

मैं कब-क्यों- कैसे बना ?

ये सब पुरातत्व विभाग से पूछो

अभिलेखागार की बहियों से जानो

मेरे खण्डहरों से अंदाज लगाओ ,मैं कब से खड़ा हूँ ।

मैंने कितने प्रहार सहे हैं

मैंरक्षक रहा ,मेरे कारण दुश्मनों की तोड़ी आशाएं

मैं रक्षक बन तब से अब तक

आन – बान की खातिर खड़ा हूँ ।

मेरे अस्तित्व में आने की कहानी

सामन्तवाद की रक्त-रंजीत सोच

जनता का शोषण ,अमीरों का पोषण

गरीबों के खून-पसीने का प्रमाण हूँ ।

मैं गरीबों की आह हूँ

राजघराने की चाह हूँ

सैलानियों की मनोरंजन गाह हूँ

फिर भी मुल्क की धरोहर हूँ ।

मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी
मो . 9680868028


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment