Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Pani kavita by Rajesh shukla madhya pradesh

कविता : पानी…. रफ्ता रफ्ता रफ्ता कम हो रहा है पानी कुएं में, बाबड़ी में कावड़ और कावड़ी में नदियों …


कविता : पानी….

Pani kavita by Rajesh shukla madhya pradesh

रफ्ता रफ्ता रफ्ता

कम हो रहा है पानी

कुएं में, बाबड़ी में

कावड़ और कावड़ी में

नदियों में जलासों में

भूखे की प्यासों में

हर पांव की मीलों में

पोखर और झीलों में,

जगते हुए सपनों में

गैरों में अपनों में,

दिल में और मुक्कदर में

सब सात समंदर में,

पानी की कमी क्यों है?

आखों में नमी क्यों है?

बस एक  दुहाई है

पानी भी खुदाई है!

पानी में जिंदगी है

पानी में बन्दगी है,

पानी को बचाने की,

बस एक कहानी हो

इंसान में पानी हो,

इंसान में पानी हो….।

*****************

राजेश शुक्ला 

सोहागपुर जिला होशंगाबाद 

मध्यप्रदेश

स्वरचित


Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment