Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Pahle se bhi jyada by Jitendra Kabir

 पहले से भी ज्यादा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देकर सरकार बनाने वाले लोग जब खुद ही लिप्त रहें सारा …


 पहले से भी ज्यादा

Pahle se bhi jyada by Jitendra Kabir

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देकर

सरकार बनाने वाले लोग

जब खुद ही लिप्त रहें सारा समय

जोड़ तोड़ से

दूसरे दलों के विधायक व सांसदों की

खरीद फरोख्त में,

फिर मिटना कहां से था भ्रष्टाचार

वो तो पहले से भी ज्यादा

फलने-फूलने लगा है।

कानून के राज का नारा देकर

सरकार  बनाने वाले लोग

जब खुद ही लिप्त रहें सारा समय

अपने कारनामों से

कानून और संविधान की 

नींव कमजोर करने में,

फिर होना कहां से था कानून का राज

वो तो सत्तारूढ़ दलों के हाथों में

कठपुतली बन नाचने लगा है।

अखण्ड भारत का नारा देकर 

सरकार बनाने वाले लोग

जब खुद ही लिप्त रहें सारा समय

धर्म व जाति आधारित भेदभाव को

बढ़ावा देने में,

फिर होना कैसे था अखण्ड भारत का

स्वप्न साकार,

अब तो पहले से भी ज्यादा यहां

नफरत और हिंसा का दानव 

अपने पांव पसारने लगा है।

                             जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।

August 30, 2022

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे

हां मैं हूं नारीवादी!

August 28, 2022

हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्‍त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्‍वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और

खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता

August 28, 2022

कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता  कभी

कब प्रशस्त होगी हर नारी

August 25, 2022

“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ

वजह-बेवजह रूठना

August 25, 2022

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के

कविता -शहर

August 22, 2022

शहर गांवों के सपने  संभाल लेता है शहर  हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों

PreviousNext

Leave a Comment