Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Olympic medal kaise aayenge by Jitendra Kabir

 ओलंपिक मेडल कैसे आएंगे? इस देश में राजनेता और उनके रिश्तेदार ही खेल संघों में जब तक सारे उच्च पद …


 ओलंपिक मेडल कैसे आएंगे?

Olympic medal kaise aayenge by Jitendra Kabir

इस देश में राजनेता और

उनके रिश्तेदार ही

खेल संघों में जब तक सारे

उच्च पद हथियाएंगे,

योग्य खिलाड़ियों पर तब तक

तरजीह ज्यादातर सिफारिशी 

और पैसे वाले ही पाएंगे।

सभी खेलों के लिए

आधारभूत ढांचे के निर्माण से

जब तक हम कतराएंगे,

विश्व-स्तर के खिलाड़ी

बहुत ज्यादा तो तैयार

नहीं कर पाएंगे।

खिलाड़ियों के लिए

विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण और 

सुविधाओं को जब तक हम

उपलब्ध नहीं कराएंगे,

तब तक विश्व-स्तर पर

हमारे इक्का-दुक्का खिलाड़ी ही

देश का झंडा लहरा पाएंगे।

भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद

की संस्कृति से हमारे खेल

जब तक आजाद न हो पाएंगे,

ओलंपिक की मेडल सूची में

भारत का नाम हम

बहुत सारे देशों से नीचे ही पाएंगे।

                         जितेन्द्र ‘कबीर’

                         

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कैसे कोई गीत सुनाये-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

कैसे कोई गीत सुनाये कितने साथी छूट गएसब रिश्ते नाते टूट गएपल-पल मरती आशाएंजब अपने ही लगें परायेकैसे कोई गीत

प्रणय जीवन- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

प्रणय जीवन प्रेम जीवन में प्रवाहित,प्रेम से जीवन जुड़ा है,प्रेम का परिणाम हम हैं,प्रेम को जीवन समर्पित ।। जिंदगी पर्याय

जीने का अनुराग नहीं – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

जीने का अनुराग नहीं प्यासी है नदियां प्यासा है सावन,बर्षा की बेला प्यासा है चातक ,प्यासी है धरती प्यासा है

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

Leave a Comment