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Nishkam karm by Anita Sharma

 निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित …


 निष्काम कर्म

Nishkam karm by Anita Sharma

हम कर्म करें निषकर्म भाव से।

हो सेवा निष्कर्म भावों की।

न अपेक्षा रखे किसी से।

न उपेक्षित भाव मिले।

**** 

हो कर्म अपना मेहनत हो पूर्ण।

शान्ति मनो में हो और विश्वास प्रबल हो।

सहृदयी हृदय से निष्कर्म सेवा।

***

है जान तन में कर्मठ रहेंगे।

जीवन को अपने सार्थक करेंगे।

रहे सांस तन में निष्कर्म निष्ठा रहेगी।

***

संस्कार अपने सार्थक करेंगे।

हस्तान्तरित निष्कर्म निष्ठा करेंगे।

देगें भावी पीढ़ी को शिक्षा यही।

***

निष्ठा,परोपकार और निष्पक्ष सेवा।

कर्म का प्रारब्ध भविष्य उज्जवल बनेगा।

सत्कर्मों की ओर जाग्रत करगे।।

***

—–‘अनिता शर्मा झाँसी

—-‘मौलिक रचना


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