Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Naari by Jay shree birmi

  नारी नारी हूं मैं,बुराइयों पर भारी हूं मैं मोम  सी हूं मैं सच्चाई पर भीतर से कड़ी हूं पत्थर …


  नारी

Naari by Jay shree birmi

नारी हूं मैं,बुराइयों पर भारी हूं मैं

मोम  सी हूं मैं सच्चाई पर

भीतर से कड़ी हूं पत्थर से भी

न झुकती हूं न रुकती हूं

सरपट बढ़ती जाती हूं

न ही कोई रुकावट का असर 

न कोई भी,कभी भी खेद हैं

पाना ही हैं लक्ष्य और डटें रहना हैं

न छूटे पतवार हाथों से बस पकड़े रहना हैं

मजधार हो या किनारा मंजिल को पाके रहना हैं

मोम हूं मैं अपनों के लिए 

फिर वहीं पत्थर से भी कड़ी हूं मैं

पाने के लिए लक्ष्य को दम साधे खड़ी हूं मैं

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

Leave a Comment