Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Naari by Jay shree birmi

  नारी नारी हूं मैं,बुराइयों पर भारी हूं मैं मोम  सी हूं मैं सच्चाई पर भीतर से कड़ी हूं पत्थर …


  नारी

Naari by Jay shree birmi

नारी हूं मैं,बुराइयों पर भारी हूं मैं

मोम  सी हूं मैं सच्चाई पर

भीतर से कड़ी हूं पत्थर से भी

न झुकती हूं न रुकती हूं

सरपट बढ़ती जाती हूं

न ही कोई रुकावट का असर 

न कोई भी,कभी भी खेद हैं

पाना ही हैं लक्ष्य और डटें रहना हैं

न छूटे पतवार हाथों से बस पकड़े रहना हैं

मजधार हो या किनारा मंजिल को पाके रहना हैं

मोम हूं मैं अपनों के लिए 

फिर वहीं पत्थर से भी कड़ी हूं मैं

पाने के लिए लक्ष्य को दम साधे खड़ी हूं मैं

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

गुरूजी आओ

June 27, 2022

गुरूजी आओ कब आओगे, ले गुरु अवतार, पूछे संसार।। है हर पल, गुरु बिन उदास, तेरी है प्यास ? रूठता

तुम्हारा असर है इस कदर

June 24, 2022

 तुम्हारा असर है इस कदर जितेन्द्र ‘कबीर’ प्रफुल्लित मन मदमस्त होकर बादलों के रथ पर सवार आकाश चूमता है, सुकून

कविता- मैं तुमसे प्यार करता हूँ

June 24, 2022

 कविता- मैं तुमसे प्यार करता हूँ R.S.meena Indian मैं चाहता हूँ तुमको,ना इनकार करता हूँ । मजबूर हूँ मैं दिल

उतरन

June 24, 2022

 उतरन वीना आडवाणी तन्वी पूछो अमीरों उन गरीबों से  उतरन का महत्व कितना होता अमीरों तुम्हारी उतरन देख कर गरीब

आज रक्तदान दिवस है देवदूत बन जाइए

June 24, 2022

 आज रक्तदान दिवस है      देवदूत बन जाइए वीना आडवाणी तन्वी किसी मरीज़ को रक्त दान कर किसी के लिए

पिता नीम का पेड़ !

June 24, 2022

पिता नीम का पेड़ ! डॉo सत्यवान सौरभ ★★★★हम कच्चे से है घड़े, और पिता कुम्हार !ठोक पीट जो डांट

PreviousNext

Leave a Comment