Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mom si nari by Anita Sharma

 “मोम सी नारी” बाहर से सख्त अन्दर से नर्म है। भावनाओं में बह सर्वस्व लुटा देती। हाँ अधिकतर छल से …


 “मोम सी नारी”

Mom si nari by Anita Sharma

बाहर से सख्त अन्दर से नर्म है।

भावनाओं में बह सर्वस्व लुटा देती।

हाँ अधिकतर छल से छलनी हो जाती।

कभी न समझा जमाने ने उसे ।

मोम सी जलती-पिघलती रही ।

सबका ख्याल-ख्वाहिशे समझी उसने।

पर हाय!न भावनाएँ समझी किसी ने।

नारी जीवन की यही कहानी है।

स्वाभिमानी और मेहनती इसकी निशानी है।

जान तक न्योछावर कर देती परिवार में

पर….मान अपनेपन को तरसती है।

आंखो से अश्रु पीड़ा स्वयं पी जाती है।

बाहर नर पिशाचों से स्वयं को बचाती है।

जलकर स्वयं कई बार मरती है।

इस संसार में हर गम सहती है।

कठोर जवान की दावानल सहती है।

मोम सी हर रोज ही पिघलती है।।

—–अनिता शर्मा झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया

May 14, 2023

लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया कलम प्रखरव नहीं थी मेरी इसे प्रखरव बनाया है।।हर गहरा ज़ख़्म मेरा शब्दों में ज़हर

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार

May 11, 2023

मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार मातृदिवस विनयांजलि तेरा नाम जुबां पे आते ही मेरे दर्द सभी थम जाते हैं ,माँ

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक

May 11, 2023

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं उसने कहा बक्ष दूंगा मैंने कहा परेशान हूं

मेरे अपने ……. (Mere apne)

May 7, 2023

मेरे अपने ……. रिश्ते बंधे होते हैं, कच्चे धागे की डोर सेहमने तो संभाला बहुत, अपने रिश्तों कोपर रिश्तों की

एक कोशिश , जरिया बनने की

May 4, 2023

एक कोशिश , जरिया बनने की ज़हर जो उगले मेरी कलम छील के ये रख देती हैक्रोध कि ज्वाला धधक

कविता – अंधेरे की आवाज़ | Andhere ki awaz

April 26, 2023

अंधेरे की आवाज़  तालाब शांति में समुद्रीय हलचलविश्व का दूरस्थ प्रतिमान,जो नहीं खोज पाया खोज ही नहीं पायाकविता और कहानियों

PreviousNext

Leave a Comment