Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Meri beti by Jay shree birmi

 मेरी बेटी जब देखें कोमल हाथों को बाजू के पास मेरे एहसासों से भर गया था मन और ह्रदय  दोनों …


 मेरी बेटी

Meri beti by Jay shree birmi

जब देखें कोमल हाथों को

बाजू के पास मेरे

एहसासों से भर गया था मन और ह्रदय  दोनों मेरे

जो मांगा था रब से वही तो बाजू में मेरे धरा था

भूल सारी पीड़ा प्रसव की

खो गई में देख स्वप्न सी परी को

सुंदर कली सी ताकती मेरा ही चेहरा

पहचान ने की कोशिश कर रही थी वो

क्या यही हैं जिसने  मान मन्नते 

 उसे बुलाया था घर  अपने

घर की रौनक और उजाले सी वो

बढ़ती गई  उम्र में छा गई वह परिवार में

प्यारी वह चाचा की पापा की दुलारी

भैया की वह सहयोगी बनी

और खेली उस के भी संग

बड़ी होती बेटी कब मां बन जाती हैं

पता न था खोई मां को बेटी ही में पाया हैं

 वैसे भी बिदाई की घड़ी मुश्किल होती है

जब वो हो बेटी की असहनीय बन जाती हे

पर खुशी यह थी की उसने भी एक बेटी पाई हैं

देख दोनों को  मैंने ये बात दोहराई

देखो आज मां भी आई बेटी भी बचपन बन के आई

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

प्रसन्न मन!

June 24, 2022

प्रसन्न मन! डॉ. माध्वी बोरसे! जब मन होता है प्रसन्न,रोकने को चाहता है वह क्षण,चलता वक्त थम जाए,कई और हम

कर्म से लिखे आत्मकथा!

June 24, 2022

कर्म से लिखे आत्मकथा! माध्वी बोरसे! लिखें हमारे जीवन की कहानी,साहस,दृढ़ता हो इसकी निशानी,कलम से नहीं कर्म से लिखें,हमारा जीवनी

खान-पान पर भी तकरार

June 24, 2022

 खान-पान पर भी तकरार जितेन्द्र ‘कबीर’ एक घर की चार संतानें… खान-पान में चारों के हैं अलग विचार, शाकाहारी है

चुनाव के पहले और बाद में

June 24, 2022

 चुनाव के पहले और बाद में जितेन्द्र ‘कबीर’ जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की 

विज्ञापन-मय भारत

June 24, 2022

 विज्ञापन-मय भारत जितेन्द्र ‘कबीर’ सरकारी अस्पतालों में पर्ची बनाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने एवं छत्तीस प्रकार के टेस्ट करवाने

सभ्यता का कलंक

June 24, 2022

 सभ्यता का कलंक जितेन्द्र ‘कबीर’ बंदरों के झुंड का सरदार अपनी शारीरिक शक्ति के बल पर संसर्ग करता है अपने

PreviousNext

Leave a Comment