Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mera shringar karo kavita by vinod kumar rajak

कविता मेंरा श्रृंगार करो  आज मैं सूनसान सड़क को निहार रहा थापांच मंजिला इमारत के छत पर खड़े हो करइसलिए …


कविता

मेंरा श्रृंगार करो 

Mera shringar karo kavita by vinod kumar rajak

आज मैं
सूनसान सड़क
को निहार रहा था
पांच मंजिला इमारत
के छत पर खड़े हो कर
इसलिए न की मैं प्रेम में था
किसी के और इंतजार में
प्रेम का रोग वर्षों पहले
मेरे भितर से छू हो गया था
जब मेरे किसान पिता ने
सूखे बबूल के पेड़ में रस्सी डाल
फांसी लगा ली थी
गांव की हरियाली जा चुकी थी
नदी नाले भी सूखे पड़े थे

धरती दरक गई थी
दरख़्तो का रक्त सूख चुका था
अकाल के काल ने लिलाना शुरू किया था
पहले हरे भरे लहलहाते खेत-खलियान
फिर जानवरों और फिर गरीब किसानो को
पिता के जाने के बाद
परिवार समेत मैंने रूख़ किया शहर का
मेरे साथ कुछ गरीब किसान शहर आ
मजदूर में तब्दील हो गए
वर्षों बित गए मजदूरी में
परिवार ठीक-ठाक चल रहा था
पर वक़्त के मार ने मुझे वहीं
लाकर खड़ा कर दिया था
जहां मेरे पिता थे
इरादा बना लिया था
पिता के पास जाने का
तभी मेरे अन्दर आत्मा से आवाज़ आई
रूक जरा माना की कठीन समय है
महामारी का दौर हैं
जीना अब शहर में मुस्किल है
जो गांव तुम छोड़ आए थे
वहां का रूख करो
और मजदूर से फिर एक बार
किसान बन जाओ
जाओ अब तो गांव भी शहर जैसा हो गया है
पर शहर गांव नहीं
शहर तो अपने को भी बेगाना बना देता है
गांव है जो गैरों को भी अपनाता है
लौट जाओ
जहां तुम्हारा प्राण बसता है
जहां की मिट्टी में तुम्हारी पुरखों की
यादें हैं तुम भले भुल गए
पर आज भी मिट्टी तुम्हें भुला न पाई
तुम्हारा ह्रदय जानता है
गांव की मिट्टी आज भी तुम्हें
बुलाती है तुम्हारे पगो को सहलाने के लिए
हे! माटी के लाल तुम आओ और
फिर से किसान बन हलो में धार दो
और मेरा श्रृंगार करो
मैं बंजर
तब से जब से तुम गए
किसान से बनने मजदूर शहर को
कवि बिनोद कुमार रजक प्रभारी शिक्षक न्यु डुवार्स हिंदी जुनियर हाईस्कूल पोस्ट-चामुरची बानरहाट जिला-जलपाईगुड़ी राज्य-पश्चिम बंगाल 735207
शिक्षा-एम ए,बीए,बी एड ,यु जी सी नेट


Related Posts

Priye ke desh by Indu kumari

November 17, 2021

 प्रिय के देश तुम भी  उनके  हो प्रिय, मैं  भी उनकी  प्रियतमा। जिसे ढूँढती  है अन्तर्मन, पूजती  है   सारा   जहाँ

Kaliyo ki shahjadi by vijay Lakshmi Pandey

November 17, 2021

 कलियों की शहजादी…!!! कलियों की शहजादी कोईअरमानों की डोली चढ़हरियाली मखमल कीसेज सजाओढ़ घटाओं कीसतरंगी चादर..!!! रंगीन ख्वाब से सराबोर

Kyu nhi aata mera janmdin by vijay Lakshmi Pandey

November 17, 2021

 #क्यों नहीं आता मेरा जन्म दिन…?? अम्माँ , तूनें  तो मेरा  दान कर दिया, अब कैसे तिलक लगाएगी? मुझे पता

Dharti aur ambar by siddharth gorakhpuri

November 17, 2021

  धरती और अम्बर जब बादल गरजा करते हैं और बिजली कड़का करती है। फिर धरती से छोटी बूंदे हँस

Aajkal ke vidwan by Jitendra Kabir

November 17, 2021

 आजकल के विद्वान इतिहास के नाम पर जिन लोगों ने पढ़ी किसी विशेष धर्म और विचारधारा की केवल ‘प्रचार सामग्री’

Bal divash by mainudeen kohri

November 15, 2021

 बाल दिवस   आओ बच्चों  आओ खेलें कूदें नाचे गाएं हम सब मिल  कर चाचा का जन्म मनाऐं  । चिड़िया घर

Leave a Comment