Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mera beta happy kavita by vijay Lakshmi Pandey

    ” मेरा बेटा हैप्पी” मेरा बेटा मिट्टी खाता , बहुत बड़ा दुर्गुण है यह। हर समय शिकायत सुन …


 

  ” मेरा बेटा हैप्पी”

Mera beta happy  kavita by vijay Lakshmi Pandey

मेरा बेटा मिट्टी खाता ,

बहुत बड़ा दुर्गुण है यह।

हर समय शिकायत सुन -सुन कर,

थक गए कान अब रहनें दो।

है खेल रहा जैसे तैसे ,

जो जी में आये करनें दो।

यह नट-खट रोता रहता है,

सारा दिन बक-बक करता है।

खेल -खिलौनें नहीं चाहिए ,

पल्लू पकड़े रहता है ।

तुतला-तुतला कर बोल रहा,

प्रति क्षण उलझाए रखता है ।

यह “तीन” बरस का “बेटा” है,

हर समय ख़ुशामद करवाता।

रो -धो कर अपनीं सारी जिद 

कैसे  ही पूरी करवाता ।

ये बाल रूप ,अनजान रूप ,

ये क्या करते ,ये क्या जानें ।

इनके भी अपनें काम बहुत ,

जो हमसे मेल न खा पाते ।

यह क्या ??? ये ज़िद ले बैठे ,

यह वस्त्र नहीं जँचता मुझको ।

मैं नहीं पहनता ले जाओ ,

कोई अच्छा सा ले आओ ।

या यूं ही मैं स्कूल चला !!

उलझा -बिखरा मैला-मैला ।

दोनों हाथों में चॉक लिए ,

थैले को रेतों से भरकर  ।

क्या हाल बनाया है अपना ,

अब लिपट रहे मुझसे आकर ।

हमनें जो इनको टोक दिया ,

ये जमा रहे हैं रौब बड़ा ।

मत भरो हाज़िरी बच्चों की ,

लाओ रोटी खोलो डिब्बा ।

मैं दंग हुई क्या करूँ हाय !!

है समय -चक्र पहला -पहला,

क्या हाल बनाएंगे “हजरत”

आते-आते अंतिम घण्टा ।।✍️✍️

         विजय लक्ष्मी पाण्डेय

        एम. ए., बी.एड.(हिंदी)

        स्वरचित  मौलिक रचना

        विधा –  एक संस्मरण

             आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

गुंजा के दाने

October 1, 2022

गुंजा के दाने रमणीय , मनमोहक , चमकदारगुंजा के दाने मन को हर जाते हैसुर्ख चटकीले लाल रंग लिये येकाले

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

October 1, 2022

2 अक्टूबर 2022 महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष में उनके सिद्धांतों और विचारों पर मौलिक रचना कविता –गांधीजी के सिद्धांत

Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye

October 1, 2022

 Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye फिर वही क़िस्सा सुनाना तो चाहिए फिर वही सपना सजाना तो चाहिए यूँ मशक़्क़त

मुझे कहां पता था

October 1, 2022

मुझे कहां पता था आरज़ू थी तेरे संग जिंदगी बिताऊंगीआरज़ू थी तेरा साथ अंत तक मैं निभाऊंगी।। मेरी आरज़ूओं को

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi

October 1, 2022

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi गँवाई ज़िंदगी जाकर बचानी चाहिए थीबुढ़ापे के लिए मुझको जवानी चाहिए थी समंदर भी

हदें

September 28, 2022

हदें शान हैं उसी में इंसान अपनी हद में रहेंजब छोड़ हद न समंदर न ही नदी बहेँइंसान ही हद

PreviousNext

Leave a Comment