Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Meera diwani kanha ki by Indu kumari

 मीरा दीवानी कान्हा की मीरा दीवानी कान्हा की प्रेम से छलकत जाय  जागत रहे दिन -रात फिर भीदरस ना पाय  …


 मीरा दीवानी कान्हा की

Meera diwani kanha ki  by Indu kumari

मीरा दीवानी कान्हा की

प्रेम से छलकत जाय 

जागत रहे दिन -रात

फिर भीदरस ना पाय 

शुली ऊपर सेज है

लगी प्रेम की डोर 

लागी ऐसी लगन है

कोशिश करी पुरजोर

जब तलक मिले नहीं

छोड़ी न आस की डोर

गिरधर नागर को पायी

 करी तप करजोर

प्रेम की ताकत में 

ठहर न पावै कोय

प्रीत के बल से लखावे 

दूजा ना देखे कोय ।

        स्व रचित 

डॉ. इन्दु कुमारी हिन्दी विभाग मधेपुरा बिहार


Related Posts

इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार | isliye tumse milta hu mai bar bar

January 2, 2023

 इसलिए तुमसे मिलता हूँ मैं बार बार इसलिए तुमसे मिलता हूँ , मैं बार बार। मैं मनाता हूँ तुमको, इसलिए

ना रहा यकीन तुझपे | na raha tujhpe yakeen

January 2, 2023

 ना रहा यकीन तुझपे ना रहा यकीन तुझपे,ना कोई उम्मीद तुमसे। हो गई अब वो खत्म, जो थी उम्मीद तुमसे।।

हम नये वर्ष में यह प्रण करें

December 31, 2022

 हम नये वर्ष में यह प्रण करें हम नये वर्ष में यह प्रण करें। हम जीवन को ऐसा धारण करें।।

नववर्ष मंगल भावना | navvarsh mangal bhavna

December 31, 2022

नववर्ष मंगल भावना नव वर्ष में कुछ यूं जहां में प्रेम का विस्तार हो,ना कोई भूखा हो शहर में बीमार

अलविदा 2022 |सोचो आगे क्या करना है ?

December 31, 2022

अलविदा 2022 |सोचो आगे क्या करना है ? सोचो आगे क्या करना है ?सोचो कैसे आगे बढ़ना है ?सोचो क्या

कविता अहमियत| kavita ahmiyat

December 30, 2022

अहमियत वक़्त की अहमियत को समझो,यह न वापिस आएगा।छूट जाएगा जीवन में बहुत कुछ,तू केवल पछताएगा।अहमियत दे रिश्तों को बन्दे,यही

PreviousNext

Leave a Comment