Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mausam by Anita Sharma

 “मौसम” मौसम तो बदलते रहते हैं। जीवन में कयी पड़ाव आते रहते हैं। कभी खुशी-कभी गम । प्रकृति के बदलते …


 “मौसम”

Mausam by Anita Sharma

मौसम तो बदलते रहते हैं।

जीवन में कयी पड़ाव आते रहते हैं।

कभी खुशी-कभी गम ।

प्रकृति के बदलते स्वरूप में–

ऋतुये बदलती रहती है।

मानव की मनोदशा भी बदलती है।

हर पल परिस्थिति परिवर्तित होती है।

ग्रीष्म-शीत-बरसात और बसंत।

कुछ ऐसी ही तो मनोदशा भी बदलती है।

जीवन के मौसम उतार-चढ़ाव मौसम की तरहबदल जाते हैं।

कितनी छविया बदलती रहती है।

मौसम नित् नये रूप बदलते हैं।

हर मौसम का असर मानव मन पर स्पष्ट है।

जीवन की चार अवस्था भी मौसम के समान है।

जीवन में पतझड़-बसंत आते हैं।

हर रंग बदलते देखें हैं जीवन में।

मौसम बदलते रहते हैं।।

—-अनिता शर्मा झाँसी
—-मौलिक रचना


Related Posts

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

श्रद्धांजलि-नंदिनी लहेजा

December 10, 2021

श्रद्धांजलि नम हैं हिंदुस्तान आज , जो खोया वीर सपूत।जीवन साथी संग उनके,जाबांज़ वीर भी, क्षति हुई अभूत।इक ज़लज़ला आया

अपना एक घर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

अपना एक घर बहुत आलीशान न भी हो,मामूली-सी छत के नीचे होचाहे साधारण सा एक कमरा,घांस-फूस से बनी झोंपड़ी होअथवा

Leave a Comment