मंजिल
भूल जाना किसी तरह से
जो राह की रूकावट है
सजा लेना माथे पे सदा ही
जो जिन्दगी की सजावट है
कामयाबी की सीपी प्रयत्न
सौपान से ही मिलती है
सुन्दरता की मिसाल कमल
आकंठ कीचड़ में रहती है
जिन्दगी के थपेरों से सीखें
मंजिल की नाव पर चढ़ना
जब बढ़ने की तरप होगी
रोके नहीं रूकेगी बढ़ना
कर्म पथ है जीवन प्यारे
चलते सदा-सदा ही रहना
मंजिल तो मिलकर रहेगी
फतह हासिल होकर रहेगी
खुशियों की सौगात मिलेगी
मंजिल की मुस्कान मिलेगी।





