Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Manzil by Indu kumari

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की …


 मंजिल

Manzil by Indu kumari

भूल जाना किसी तरह से

जो  राह की  रूकावट  है

सजा लेना माथे पे सदा ही

जो जिन्दगी की सजावट है

कामयाबी की सीपी प्रयत्न  

 सौपान से  ही  मिलती  है  

सुन्दरता की मिसाल कमल

आकंठ कीचड़ में रहती है

जिन्दगी के थपेरों से सीखें

मंजिल की नाव पर चढ़ना

जब बढ़ने  की तरप होगी

रोके  नहीं  रूकेगी बढ़ना

कर्म  पथ है जीवन  प्यारे

चलते सदा-सदा ही रहना

मंजिल तो मिलकर रहेगी

फतह हासिल होकर रहेगी

 खुशियों की सौगात मिलेगी

मंजिल की मुस्कान मिलेगी।

  डॉ.इन्दु कुमारी
         मधेपुरा बिहार


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment