Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Manzil by Indu kumari

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की …


 मंजिल

Manzil by Indu kumari

भूल जाना किसी तरह से

जो  राह की  रूकावट  है

सजा लेना माथे पे सदा ही

जो जिन्दगी की सजावट है

कामयाबी की सीपी प्रयत्न  

 सौपान से  ही  मिलती  है  

सुन्दरता की मिसाल कमल

आकंठ कीचड़ में रहती है

जिन्दगी के थपेरों से सीखें

मंजिल की नाव पर चढ़ना

जब बढ़ने  की तरप होगी

रोके  नहीं  रूकेगी बढ़ना

कर्म  पथ है जीवन  प्यारे

चलते सदा-सदा ही रहना

मंजिल तो मिलकर रहेगी

फतह हासिल होकर रहेगी

 खुशियों की सौगात मिलेगी

मंजिल की मुस्कान मिलेगी।

  डॉ.इन्दु कुमारी
         मधेपुरा बिहार


Related Posts

कलियुग का रामराज्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

कलियुग का रामराज्य शालीनता भगवान राम का गुण थालेकिन उनकी धरती पर रामराज्यसोशल मीडिया पर दिन-रात गंदी अश्लील गालियांबकने वाले

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

February 24, 2022

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से

अपनी व्यथा किसे सुनाएं

February 24, 2022

अपनी व्यथा किसे सुनाएं अपनी व्यथा किसे सुनाऊं बात समझ ना आई दुखों का पहाड़ टूटा घर में वीरानी छाई

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Leave a Comment