Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Manav mulya kavita by Sudhir Shrivastava

 मानव मूल्य बहुत अफसोस होता है मानव मूल्यों का क्षरण लगातार हो रहा । मानव अपना मूल्य स्वयं खोता जा …


 मानव मूल्य

Manav mulya kavita by Sudhir Shrivastava

बहुत अफसोस होता है

मानव मूल्यों का क्षरण

लगातार हो रहा ।

मानव अपना मूल्य

स्वयं खोता जा रहा है,

आधुनिकता की भेंट 

मानव मूल्य भी 

चढ़ता जा रहा है,

मर रही है मानवता

रिश्ते भी हैं खो रहे

संवेदनाएं कुँभकर्णी 

नींद के आगोश में हैं।

मानव जैसे मानव रहा ही नहीं

बस मशीन बन रहा है,

कौन अपना कौन पराया

ये प्रश्न पूछा जा रहा है।

मानव ही मानव का दुश्मन

बनकर देखो फिर रहा है,

मानव अब मानव कहाँ

जानवर बनता जा रहा है।

मिट्टियों का मोल भी

जितना बढ़ता जा रहा है,

मानवों का मूल्य अब

उतना ही गिरता जा रहा है।

            सुधीर श्रीवास्तव

             गोण्डा, उ.प्र.

             8115285921

        © मौलिक, स्वरचित


Related Posts

नारी महिमा

February 24, 2022

नारी महिमा  चाँद की तरह शीतल है नारी।सूर्य की तरह तेजस्वी है नारी।।धरती की तरह धैर्यवान है नारी।सागर की तरह

बेटी

February 24, 2022

बेटी सावन में डाली का झूला है बेटी।उपवन में खिलता गुलाब है बेटी।उगते हुए सूर्य की लाली है बेटी।सन्ध्या में

गृहणी

February 24, 2022

गृहणी बहुत कड़वा है यह अनुभव, सोच और सच्चाई का।दोष किसका है यहां पर, केवल अपने आप का।सब को सुला

छत्रपति शिवजी महाराज

February 24, 2022

छत्रपति शिवजी महाराज छत्रपति शिवजी महाराजझुके नहीं मुगलों के आगे ,शौर्य- साहस के हैं प्रतीक।मराठा साम्राज्य की नींव बने जो,महान

इम्तिहान के पल

February 24, 2022

इम्तिहान के पल! रहना अपने लक्ष्य पर अटल,इरादे नहीं, अपने तरीके बदल,ठहरना ना, तू बस चल,पार कर ले इम्तिहान के

राजस्थानी कविता-मईनुदीन कोहरी “नाचीज बीकानेरी “

February 24, 2022

(राजस्थानी भाषा री मान्यता सारू म्हारी जिद है मान्यता मिळ सकै राजस्थानी अकेडमी रै गठन ताईं एक कविता रोजानां  राजस्थानी

Leave a Comment