Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Man mastishk kavita by Anita Sharma

 मन-मस्तिष्क मन-मस्तिष्क में उमड़ते-घुमड़ते, विचारों की शृंखला। कितनी उलझी-सुलझी गुत्थियां , उठते-गिरते विचार । *** कितनी लहरें सुख-दुःख की समांई …


 मन-मस्तिष्क

Man mastishk kavita by Anita Sharma

मन-मस्तिष्क में उमड़ते-घुमड़ते,

विचारों की शृंखला।

कितनी उलझी-सुलझी गुत्थियां ,

उठते-गिरते विचार ।

***

कितनी लहरें सुख-दुःख की समांई ,

मस्तिष्क की गहराई में।

कितनी यादें नई-पुरानी हलचल करती,

मन-मस्तिष्क में उमड़ घुमड़।

**

कितना शोर मचाते उठते-गिरते भाव,

मन विभ्रमित होता भावों से।

कितने भावो की निष्क्रियता गिरती,

नाजुक भावों की उत्पत्ति से।

**

मनोभावों के गिरते-उठते कोलाहल ,

का झंझावात समेटे मन।

बहुत मुखरित शोर मचाते तनावग्रसित,

उहा-पोह के शंकित भाव।

**

एकाग्रता के मनोभावों का शांत भाव ,

तन्मयता भर देता मन-मस्तिष्क में।

नितान्त स्थिर मन चैतन्यता से ओत-प्रोत,

स्थिरता विचारों की भर देता ।

**—अनिता शर्मा झाँसी

**—मौलिक रचना

—–


Related Posts

अच्छे के लिए होता है !

March 26, 2022

अच्छे के लिए होता है ! राजा और मंत्री शिकार के लिए निकले, जंगल में आए, बहुत सारी झाड़ी और

दयावान बने!

March 26, 2022

दयावान बने! सोए हुए शेर के ऊपर चढ़ा चूहा,शेर उठा और हुआ आग बबूला,गुस्से में कहा, तुम्हें कौन बचाएगा,यह खूंखार

अजय प्रसाद की रचनाएं

March 26, 2022

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों

मेरा मन है एक बंजारा- वीना आडवाणी तन्वी

March 26, 2022

मेरा मन है एक बंजारा मेरा मन है एक बंजारा स्थिर नहीं ये फिरता मारामाराकभी प्राकृतिक सौंदर्य में फिरेतो कभी

हौंसले-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

हौंसले एक सुंदर नारीचल पड़ी गगन विहारीथा उसे उडना बहुतदूर दूर क्षितिज से भी दूरपंख थे छोटे और कोमलपार करेगी

जब वक्त थम सा गया-जयश्री बिरमी

March 25, 2022

जब वक्त थम सा गया एक बार ही मिली नजरें तो दिल उसी पर आ गयामिलने के लिए उसी से

PreviousNext

Leave a Comment