Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mai shapit hu by komal Mishra koyal

 मैं शापित हूँ घुट घुट कर मर जाने को मैं शापित हूँ हर बार जलाए जाने को नहीं कह पाती …


 मैं शापित हूँ

Mai shapit hu by komal Mishra koyal

घुट घुट कर मर जाने को

मैं शापित हूँ

हर बार जलाए जाने को

नहीं कह पाती हूँ मैं दर्द अपना

मैं शापित हूँ

चुपचाप सह जाने को

पीड़ा देखती हूँ उनकी

मैं भी रो पड़ती हूँ

हाँ मैं शापित हूँ

कुछ ना कह पाने को

होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे जैसे

पैरों में बिवाइयाँ या हो मोटे छाले

पर हम शापित हैं

उस चुभन को सह जाने को

हर बार मुस्कुराने को

हाँ हम सब शापित हैं

स्त्री हो जाने को

             कोमल मिश्रा “कोयल” प्रयागराज


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment