Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mai shapit hu by komal Mishra koyal

 मैं शापित हूँ घुट घुट कर मर जाने को मैं शापित हूँ हर बार जलाए जाने को नहीं कह पाती …


 मैं शापित हूँ

Mai shapit hu by komal Mishra koyal

घुट घुट कर मर जाने को

मैं शापित हूँ

हर बार जलाए जाने को

नहीं कह पाती हूँ मैं दर्द अपना

मैं शापित हूँ

चुपचाप सह जाने को

पीड़ा देखती हूँ उनकी

मैं भी रो पड़ती हूँ

हाँ मैं शापित हूँ

कुछ ना कह पाने को

होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे जैसे

पैरों में बिवाइयाँ या हो मोटे छाले

पर हम शापित हैं

उस चुभन को सह जाने को

हर बार मुस्कुराने को

हाँ हम सब शापित हैं

स्त्री हो जाने को

             कोमल मिश्रा “कोयल” प्रयागराज


Related Posts

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

कोशिश-नंदिनी लहेजा

January 6, 2022

विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और

Leave a Comment