Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mai kya likhun by Nandini laheja

मैं क्या लिखूं कभी जो मन बड़ा बेचैन हो जाताचाहता है कुछ बोलना पर कह नहीं पाताआसपास की घटनाएं करती …


मैं क्या लिखूं

Mai kya likhun by Nandini laheja

कभी जो मन बड़ा बेचैन हो जाता
चाहता है कुछ बोलना पर कह नहीं पाता
आसपास की घटनाएं करती व्यथित बड़ा
पर न उनका हल कुछ निकल है पाता
मन फिर होने लगता है भारी
कहते अपने मित्र कलम से अब तेरी है बारी
उठाते है डायरी अपनी और कलम
जो आता मन में बस वही लिख लेते हम
मैं क्या लिखूं यह प्रश्न मन में आता कई बार
क्या उत्तर में पाउँगा बदले में इस – बार
माना की सामने कोई इंसान ना खड़ा
जो जवाब दे उन प्रश्नों का जिनको हमने लिखा
पर सच कहूं जो लिखते है वे करते सवाल स्वयं से
क्या बदलाव ला सकते है हम पहले स्वयं से
लिखना हमें अपनी अंतरात्मा से जोड़ता
उस से ही तो बन्दे तू स्वयं में बदलाव कर पाता
यह याद रख जब बदलेगा तू, समाज बदलेगा
बस लिखता जा न सोच मैं की क्या लिखूं तुझे जवाब जरूर मिलेगा

नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित


Related Posts

Kaikeyi ke ram by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 कैकेयी के राम कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को

Kab tak madhusudan duadenge by vijay Lakshmi Pandey

September 4, 2021

 कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!! कब तक   मधुसूदन दौड़ेंगे । द्रुपद सुता की लाज बचानें।। दरबार सजा  जब  कौरव का ।

Moolbhoot samasyaye vhi hai by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 मूलभूत समस्याएं वही हैं एक वक्त का खाना  जैसे तैसे जुटाकर  दूसरे वक्त की चिंता जिस इंसान के दिमाग में

Rishto ka mahatva by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 रिश्ता की दूरियां-नजदीकियां रिश्तों का महत्व  लंबी दूरियों से नहीं मन की दूरियों से होता है, अन्यथा माँ बाप और 

Teer nadi ka By H.K Mishra

September 4, 2021

 तीर नदी का तीर नदी का दूर किनारा , कहां नहीं तुझको ढूंढा है, रात अंधेरी नदी उफनती, मिलन अंत

Jhoothon ka hai jamana by Jitendra Kabir

August 29, 2021

 झूठों का है जमाना एक बार झूठ बोल कर उसे छुपाने के लिए झूठ पर झूठ बोलते जाना, पकड़े भी

Leave a Comment