Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Mai kya likh du by vijay Lakshmi Pandey

 मैं क्या लिख दूँ.!!! प्रस्तुत कविता में हो रहा संवाद हमारे और हमारे बेटे के बीच का  है…!! तूनें कहा …


 मैं क्या लिख दूँ.!!!

प्रस्तुत कविता में हो रहा संवाद हमारे और हमारे बेटे के बीच का  है…!!

Mai kya likh du by vijay Lakshmi Pandey

तूनें कहा कुछ श्री राम पर लिख..!

खुद  राम  सा  वन गमन   किए ..!!!

उन  पर लिखूँ  या तुझ पर लिखूँ..!

किस पर लिखूँ  क्या  कह  गए…?

माता    कैकेयी    पिता  दशरथ..!

मन्थरा    को    मध्यस्थ  कर …!!!

दनुज  दलन  को  वन  गये वो..!

पर    लखन  के  संग गए  वो..!!!

तुमको  किसनें  वन वास किया.?

तुम  जो  अकेले  घर  से गये..!!!

बता..!  किसके    निमित्त  गए ..?

न  कुछ  कह  गए ना सुन  गए ..!!!

आराध्य   हैं   श्री  राम   हमारे . .!

पर  तुम “विजय” की आस हो..!!!

क्यों  कहा  श्री राम  पर लिख..?

क्या   लिखूँ  ना  कह    गए …!!!

जन्म   लिख  दूँ,  बाल  लीला..!

या     गुरुवर    संग    श्रेष्ठता ..?

कौशल्या  का  त्याग  लिख दूँ ..?

या    प्रसंग  कुछ  व्याह   के ..!!!

न सजी बारात  निज  धाम से..!

जो    माताओं   के  चाह  थे…!!!

या     गमन      वनवास    के ..?

दशरथ  मरण  ,सीता  हरण ..!!!

विभीषण की गद्दारी  लिख  दूँ ..?

या      लंकापति   नाश    के..!!!

सीता    पुनर्वनवास   लिख दूँ..?

अग्नि     परीक्षा   मात    के ..!!!

तूनें कहा कुछ श्री राम पर लिख..!

कुछ  तो कहो मैं क्या लिख  दूँ.!!!

उन पर लिखूँ या तुझ पर लिखूँ ..?

किस  पर  लिखूँ  क्या   कह गए…??

उन   सा  तेरा   किरदार     था ..!

तुम  तो  सदा   मेरा    राम  था …!!!

तुझ   पर   मुझे  अभिमान  था..!

यह    कैसा    गुरु    मंत्र    था …???

राम   सा    जीवन     लिख   दूँ..?

या  वनवास   आजीवन  लिख दूँ.??

उन पर  लिखूँ  या तुझ पर लिखूँ..!

कुछ तो कहो  मैं क्या  लिख दूँ..???

                 विजय लक्ष्मी पाण्डेय
                 एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
                  स्वरचित  मौलिक रचना
                          एक आत्म मंथन
                           आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

कोशिश- अनीता शर्मा

November 23, 2021

 “कोशिश” कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हिम्मत से आगे बढ़ कर प्रयत्न करते जाना है। मन में

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

November 23, 2021

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत

जीवन रूपी चाय-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 23, 2021

जीवन रूपी चाय! बचपन हमारा, सफेद दूध जैसा, जिंदगी ने लगाया, उबाल यह कैसा, कोई ना, जिंदगी को एक स्वादिष्ट

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

November 22, 2021

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

November 22, 2021

 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन

किस्से मोहब्बत के-तेज देवांगन

November 22, 2021

 किस्से मोहब्बत के किस्से मोहब्बत के किसको सुनाएं, सब यहां कहानीकार बने है। लिख दूं गजल मैं, गर किताबों पे,

Leave a Comment