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Mahilaon ke liye surakshit va anukul mahole

 महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करना ज़रूरी –  भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक …


 महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करना ज़रूरी – 

Mahilaon ke liye surakshit v anukul mahila taiyar karna

भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक के रूप में सम्मान देती रही है 

महिला और युवा अपनी अद्भुत ऊर्जा और उत्साह से भारत को फिर सोने की चिड़िया बनाने में सक्षम – बस जज़्बे और जांबाज़ी की ज़रूरत – एड किशन भावनानी गोंदिया 

भारतीय कला और संस्कृति विश्व प्रसिद्ध है और भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक के रूप में सम्मान देती रही है। हम आदि-अनादि काल से सुनते आ रहे हैं और अब देखते भी हैं कि, भारत में महिलाओं का जितना सम्मान, सुविधा, सकारात्मक आदर है, उतना शायद ही विश्व में किसी अन्य देशमें हो क्योंकि भारत हजारों सालों से आध्यात्मिकता, सेवाभावी, परोपकारी, दयावान और पारदर्शिता विचारों वाला देश रहा है। भारत एक संत महात्माओं की जन्मभूमि भी रहा है। यही ऐतिहासिक धरोहर जैसी अनेकों मान्यताओं का को देखने विश्वभर के सैलानी भारत आते हैं और प्रभावित होकर रह जाते हैं क्योंकि मानवता का सच्चा मिसाल सबसे अधिक भारत में ही देखने को मिलता है, जिसमें धर्मनिरपेक्षता चार चांद लगा देती है। साथियों, भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति गहरे सम्मान की भावना है जो इस श्लोक में वर्णित है, जिसमें कहा गया है, जहां एक महिला का सम्मान किया जाता है, वह स्थान दिव्य गुणों, अच्छे कर्मों, शांति और सद्भाव के साथ भगवान का निवास स्‍थल बन जाता है। हालांकि, अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो सभी कार्यकलाप निष्‍फल हो जाते हैं।…साथियों बात अगर हम भारत में महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करने की करें तो हालांकि केंद्र व राज्य सरकारें इसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और हम देखते हैं कि ढेर सारी सुविधाओं, प्राथमिकताओं के साथ महिलाओं का सम्मान होता भी है लेकिन प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से हम अभी भी देखते व सुनते से आ रहे हैं कि महिलाओं के साथ भेदभाव, क्रूरता और हैवानियत होती रहती है जिसके लिए हमें वैचारिक परिवर्तन की ज़रूरत है। क्योंकि आज भी अनेक क्षेत्रों में महिलाओं पर बाबा-आदम के ज़माने की कुप्रथाएं, बंधन, रीति-रिवाज, मान्यताएं, धार्मिक-प्रतिबंध इत्यादि अनेक स्तरों पर उन्हें बंधन में रखा जाता है। हालांकि इसके खिलाफ अनेक अधिनियम भी बने हैं परंतु अब ज़रूरत है मानवीय वैचारिक परिवर्तन और जन जागरण अभियान चलाने की।…साथियों बात अगर हम ऐसे क्षेत्रों की करें जहां अभी भी महिलाएं सामाजिक, धार्मिक, बंधनों में हैं। वहां पर शुरुआत हमें खुद से करनी होगी कि महिलाओं को के प्रति भाव, भाग्य, देवी का नज़रिया अब तैयार करें। महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करने की जवाबदारी की शुरुआत, हर नागरिक खुद होके करें और भारत की प्रगति तेज़ विकास से करने के लिए महिलाओं को आगे करके उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।…साथियों बात अगर हम युवाओं की करें तो उनमें प्रोत्साहन और अद्भुत ऊर्जा उत्साह भी की अनूठी शक्ति का संचार कर भारत की प्रगति को और तेज़ किया जा सकता है, जिसके आधार पर हम विजन -2047 में वैश्विक रूप से सर्वशक्तिमान देश के रूप में उभरेंगे। हम वर्तमान भारत आजादी के अमृत महोत्सव के 75वें वर्ष का समारोह मना रहा है, यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में हमारे देश में जारी प्रयासों का भी उत्‍सव है। महिलाओं ने आज राष्ट्र निर्माण और इसके सशक्तिकरण स्‍वरूप के लिए अग्रणी प्रतिनिधियों के तौर पर अपना उचित और समान स्थान ग्रहण करना प्रारंभ कर दिया है।…साथियों बात अगर हम दिनांक 18 सितंबर 2021 को भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा संसद भवन में एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो उन्होंने भी जोर देकर कहा कि, भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक के रूप में सम्मान देती रही है। समानता के लिए भरतियार की सोच का उल्लेख करते हुए, उन्होंने ऐसी सभी बाधाओं और भेदभाव को खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया, जो जाति, धर्म, भाषा और लैंगिक आधार पर समाज को बांटते हैं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य में खुद को समर्पित करने और एक विकसित भारत- गरीबी, निरक्षरता, भूख और भेदभाव से मुक्त भारत के निर्माण के उद्देश्य से आगे आने के लिए कहा। उन्होंने कहा, मुझे भरोसा है कि हमारा युवा अपनी अद्भुत ऊर्जा और उत्साह के साथ भारत की प्रगति और तेज़ विकास को सक्षम बना सकता है। उन्होंने आज महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभावों को खत्म करने का आह्वान किया और सभी से उनके लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करने का अनुरोध किया, जिससे वे आगे बढ़ सकें और अपनी पूरी क्षमता हासिल कर सकें। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करना अत्यंत जरूरी है वैसे भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक के रूप में सम्मान देती है जो भारत के लिए गौरव की बात है। 

*-संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*


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