Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

 विजयादशमी के शुभ अवसर पर  माँ की शरण  मैया तू ही सहारा है विघ्न -बाधा हरती है। आते जो तेरे …


 विजयादशमी के शुभ अवसर पर
  माँ की शरण 

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

मैया तू ही सहारा है

विघ्न -बाधा हरती है।

आते जो तेरे द्वा र

क्लेश दूर हो जाता है।

विजय मिलती है सदा

अधर्म पर धर्मों  की

मुझे भक्ति वर दो माँ

करूं सदा तेरी पूजा

कोई आन  नहीं दूजा

तेरी शरण में ही रहुं

कृपा बरसाना  माँ

प्रतिकार करूं मैं भी

अत्याचारियों की माँ

मिटेगी  माया भ्रम

स्वरूप की दीदार करूं

जब  तेरी शरण गहूं।

              डॉ.इन्दु कुमारी

मधेपुरा पत्रकार संघ


Related Posts

kavita meri kavitaon mein jitendra kabir

May 31, 2021

मेरी कविताओं में… मेरी कविताओं में है… तुमसे जो मिली थी पहली नजर और उसके बाद निहार पाया तुम्हें जितना

Gazal – kya karu by kaleem Raza

May 31, 2021

ग़ज़ल – क्या  करू मै  तुम कहो तो अश्क आंखो से गिराऊं क्या बैठकर मै पास हाले दिल सुनाऊं क्या

kavita Dhairya na khona tum. samunder singh

May 31, 2021

कविता – धैर्य न खोना तुम आँसू से मुँह न धोना तुम। जीवन में धैर्य न खोना तुम।हर दिन सपने

kavita samay mansa wacha up.

May 31, 2021

  कविता – समय बुरे समय में साथ छोड़ने का बहाना ढूंढने वाले और साथ निभाने का बहाना ढूंढने वाले

kavita-vo vyakti pita kahlata hai chanchal krishnavanshi

May 31, 2021

वो व्यक्ति पिता कहलाता है! ख़ुद के सुख को कर न्योछावर बच्चों पर खुशियां लुटाता है बार बार संतान जो

kavita Roti mosam khan alwar rajasthan

May 30, 2021

  कविता -रोटी                                         

Leave a Comment