Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

 विजयादशमी के शुभ अवसर पर  माँ की शरण  मैया तू ही सहारा है विघ्न -बाधा हरती है। आते जो तेरे …


 विजयादशमी के शुभ अवसर पर
  माँ की शरण 

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

मैया तू ही सहारा है

विघ्न -बाधा हरती है।

आते जो तेरे द्वा र

क्लेश दूर हो जाता है।

विजय मिलती है सदा

अधर्म पर धर्मों  की

मुझे भक्ति वर दो माँ

करूं सदा तेरी पूजा

कोई आन  नहीं दूजा

तेरी शरण में ही रहुं

कृपा बरसाना  माँ

प्रतिकार करूं मैं भी

अत्याचारियों की माँ

मिटेगी  माया भ्रम

स्वरूप की दीदार करूं

जब  तेरी शरण गहूं।

              डॉ.इन्दु कुमारी

मधेपुरा पत्रकार संघ


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment