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kishan bhavnani, poem

Maa-ki-mamta-par-kavita

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है कोई करता कोई नहीं …


कविता-मां की ममता

Maa-ki-mamta-par-kavita
मां की ममता मिलती हैं सबको

कोई अच्छूता नहीं
कद्र करने की बात है
कोई करता कोई नहीं

मां वात्सल्य प्रेमामई ममता
मिलती हैं सभको कोई अच्छूता नहीं
कद्र करने की बात है,
कोई करता कोई नहीं

मां का आंचल अपने सपूतों के लिए
हरदम खुला बंद नहीं
अपनी तकलीफों दुखों से घिरी
पर ममता की छांव हटाई नहीं

चार बातें कड़वी भी सुनीं तुम्हारी
पर ममता की छांव हटाई नहीं
तुमने कद्र भले की हो या नहीं
पर मां ने ममता घटाई नहीं

हैं ऐसे भी कुछ लोग मां की ममता का
आंकलन करते नहीं
बस दिखावे में जीतें हैं मां की ममता
का सम्मान करते नहीं

समझ लो ऐसे लोगों, मां की ममता
नसीब करेगा भगवान भी नहीं
बस मां की ममता आंचल में समाए रहो
फिर पूजा पाठ की जरूरत नहीं

मां का वात्सल्य प्रेमा मई ममता
मिलती हैं सभको कोई अच्छूता नहीं
कद्र करने की बात है
कोई करता कोई नहीं

Abou author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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