Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Maa katyayni by Sudhir Srivastava

 माँ कात्यायनी महर्षि कात्यायन की कन्या माँ कात्यायनी कहलाती, माँ के षष्टम स्वरूप में जग में पूजी जाती। स्वर्ण सदृश्य …


 माँ कात्यायनी

Maa katyayni by Sudhir Srivastava

महर्षि कात्यायन की कन्या

माँ कात्यायनी कहलाती,

माँ के षष्टम स्वरूप में

जग में पूजी जाती।

स्वर्ण सदृश्य चमकती है माँ

शोक,संताप है हरती,

रोग, दोष भय माता अपने

भक्तों के हर लेती।

कालिंदी के तट जाकर

ब्रज की गोपियों ने पूजा,

पति रूप में मिलें कन्हैया

माँ कात्यायनी को ही पूजा।

सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त में

जिसनें भी माँ का ध्यान किया,

दिव्य स्वरूप में माँ ने उसको

एकाग्रचित का वरदान दिया।

धर्म, अर्थ, काम,मोक्ष का वर

माँ कात्यायनी भक्तों को है देती,

शोधकार्य की अधिष्ठात्री मैय्या

वैज्ञानिक अनुसंधान कराती।

माँ की भक्ति जो करे

मन में रख विश्वास,

मैय्या की कृपा रहे

सदा ही उसके साथ।

✍सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा(उ.प्र.)
   8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

धारा के विपरीत

June 24, 2022

 धारा के विपरीत जितेन्द्र ‘कबीर’ शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी

अस्तित्व इतिहास बनेगी

June 24, 2022

 अस्तित्व इतिहास बनेगी सुधीर श्रीवास्तव पृथ्वी दिवस की औपचारिकता न निभाइए भू संरक्षण करना है तो  धरातल पर कुछ करके

यही जीवन चक्र है

June 24, 2022

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन

व्यंग्य धरती को मरने दो

June 24, 2022

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत

जब तक है जिंदगी

June 24, 2022

 जब तक है जिंदगी सुधीर श्रीवास्तव जिंदगी जब तक है गतिमान रहती है, न ठहरती है,न विश्राम करती है। सुख

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

PreviousNext

Leave a Comment