Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Archna_chauhan, poem

Maa- Archana chauhan

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे …


माँ

Maa- Archana chauhan
इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई

तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे हो गई ?

जिस मां की लोरी सुने बिना
नींद ना हमको आती थी
खुद गीले में सोती
हमको सूखे में सुलाती थी
उस मां की खातिर ,अब घर में नहीं बिछौना है

तू ही बता ए जिंदगी, 

तू इतनी सस्ती कैसे रह गई ?

जिसकी ममता की छाँव में पलकर
हम अंकुर से बीज बने
उसके नेह ,स्नेह को पाकर
हम मानुष गम्भीर बने
उस माँ की खातिर ,प्रेम हमारा क्यों बौना है?

तू ही बता ए जिंदगी, 

तू इतनी सस्ती कैसे हो गई?

खुद लाचारी में काटी
जिंदगी दी हमें आराम की
बेचारी सी जीकर
चाबी दी हमें मकान की
उस माँ की खातिर देखो , 

नहीं घर में कोई कोना है

तू ही बता ए जिंदगी, 

तू इतनी सस्ती कैसे रह गई?

अर्चना चौहान
किरतपुर
जिला बिजनौर ,उत्तर प्रदेश


Related Posts

Abki kranti gulabi ho jaye by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 अबकी क्रांति गुलाबी हो जाए बंदिशें,धमकियां,फिकरे,फब्तियां, सहती, सुनती रही हो सदियों से, अबके कार्रवाई जवाबी हो जाए, तोड़ दे घमंड

Karva chauth ka Anupam tauhar by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 करवा चौथ का अनुपम त्यौहार जिन पति – पत्नी ने बनाकर रखा है अपने मन में यह भ्रम  कि उनके

Lokpriye sarkare by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 लोकप्रिय सरकारें सदभाव की बात करना माकूल नहीं यहां पर जब भाषाएं भी वतन की धर्म के नाम पर बांटी

Unhe vichlit nhi krti bdhti kinte by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 उन्हें विचलित नहीं करतीबढ़ती कीमतें उनके घर व्यावसायिक इमारतें बना दी जाती हैं बड़े बड़े ठेकों व टेंडरों के चाह्वान

Abhi ummeed bemani hai by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 अभी उम्मीद बेमानी है अभी तक धर्म है… उस पर मंडराते बहुत से सच्चे – झूठे खतरे हैं, हमारे नेताओं

aatishbaaji jaruri nahi by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 आतिशबाजी जरूरी नहीं दीवाली – दशहरे जैसे त्यौहारों में धूम – धड़ाके को जरूरी मानना हो या फिर नववर्ष के

Leave a Comment