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Maa| माँ | maa par kavita

माँ |Maa Maa par kavita  माँ ममता की खान है,माँ दूजा भगवान है ।माँ की महिमा अपरंपार,माँ श्रेष्ठ-महान है ।। …


माँ |Maa

maa par kavita
Maa par kavita 

माँ ममता की खान है,
माँ दूजा भगवान है ।
माँ की महिमा अपरंपार,
माँ श्रेष्ठ-महान है ।।

माँ कविता, माँ है कहानी,
माँ है दोहों की जुबानी ।
माँ तो सिर्फ, माँ ही है
न हिन्दुस्तानी, न पाकिस्तानी ।।

माँ है फूलों की बहार,
माँ है सुरीली सितार ।
माँ ताल है, माँ लय है,
माँ है जीवन की झंकार ।।

माँ वेद है, माँ ही गीता,
माँ बिन ये जग रीता ।
माँ दुर्गा, माँ सरस्वती,
माँ कौशल्या, माँ सीता ।।

माँ है तुलसी की चौपाई,
माँ है सावन की पुरवाई ।
माँ कबीर की वाणी है,
माँ है कालजयी रूबाई ।।

माँ बगिया है, माँ कानन,
माँ बसंत-सी मनभावन ।
आखिर देवों ने भी माना,
माँ रूप है सबसे पावन ।।

माँ प्रेम की प्रतिमूर्ति,
माँ श्रद्धा की आदिशक्ति ।
माँ ही हज, माँ ही मदीना,
माँ से बड़ी न कोई भक्ति ।।

माँ है सृष्टि का आगाज,
माँ है वीणा की आवाज ।
माँ है मन्दिर, माँ मस्जिद,
माँ प्रार्थना, माँ है नमाज।।

माँ है गंगा-सी अनूप,
माँ धरती पे हरी धूब ।
माँ दुख हरण, माँ कल्याणी,
अजब निराले माँ के रूप ।।

(प्रियंका सौरभ के काव्य संग्रह ‘दीमक लगे गुलाब’ से।

About author 

Priyanka saurabh

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh



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