Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Lokshahi by jayshree birmi

 लोकशाही एक जमाने में पूरी दुनियां में राजा रानियों का राज था।सभी देशों में राजाओं का शासन था,और लोग उनकी …


 लोकशाही

Lokshahi by jayshree birmi

एक जमाने में पूरी दुनियां में राजा रानियों का राज था।सभी देशों में राजाओं का शासन था,और लोग उनकी प्रजा थे।कई राजा बहुत महान थे जो अपनी प्रजा के सुख दुःख का खयाल रखते थे,उनकी समस्याओं को जानने के लिए रात को भेष बदल कर गलियों में उनके साथ बैठते थे, क्योंकि अगर अपने असली रूप में उनके सामने कोई अपनी सही राय देने से कतराएंगे ।फिर उनके दुःख दर्द और  समस्या का पता नहीं लग सकता था।

और अगर राजा सनकी होता था तो उसकी सनक की वजह से प्रजा को बहुत कुछ सहना पड़ता था।कभी कभी तो वे बहुत ही अत्याचारी भी होते थे तो प्रजा बहुत दुःखी हो जाती थी।और उसके बाद विदेशी शासकों के बारे में तो कुछ पूछो ही मत, पहले तो आते थे आक्रमण कर देश को लूट चले जाते थे।फिर देश में रह राज्य कर प्रजा को लूटा।फिर गोरे आए राज किया देश को लूट खसोट कर आर्थिक ,मानसिक, सांस्कृतिक  हरेक तरीके से दोहन कर अपाहिज सा बनाया और जाते जाते कुठराघात करते गए वो आज तक हम भुगत रहें हैं।

  और एक दिन पूरब से आजादी के सुनहरी  सूरज का उदय हुआ और हम गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुए।आजादी आई साथ में लोकशाही लाई,जिसमे– जनता की सरकार,जनता के द्वारा  जनता के लिए– 

Government of the people,by the people and for the people ,

जैसे अब्राहम लिंकन ने अपने भाषण में कहा था।

लेकिन ये जो नीव रखी गई थी लोकशाही की वो कुछ मतलबी नेताओं के लिए आशीर्वाद बन गई और देश में अफसरशाही ने घर कर लिया,गरीबी,रिश्वत और  अराजकता ने देश को ग्रस लिया और अज्ञानता ने देश को घेर लिया।कई समाज सुधारक आए जो वाकई में देश में हकारात्मक सुधार लाना चाहते थे और काफी सुधार हुए भी।किंतु हम ने लोकशाही को स्वछंदता  समझा और सब अपने अपने हिसाब से लोकशाही का अवमूल्यन करने लगे।जो राजनैतिज्ञ थे वो अपनी ताकत बढ़ाने के लिए गुटबाजी पर उतर आए,अपनी वर्ण व्यवस्था को जातिवाद बना खूब उपयोग में लाएं।सब राजा नहीं बन सकते,सब राज भी नहीं कर सकते किंतु सब अपने आप को राज्य करने में समर्थ समझने लगे,राजा भोज हो तो फिर ठीक पर गंगू तैली कैसे राज करना सीखेगा, महत्वकांक्षाएं खूब बढ़ी और राजा बनने की होड़ में सभी प्रकार के अनाचार बढ़ गए,जो दिल में आए करना,किसी की भी राजकीय बैज्जती कर अपना स्थान मजबूत करना और पता नहीं क्या क्या।

 तोता चश्म बन गया नेता, चुनाव के समय आना मत लेने फिर मैं कौन तुम कौन? 

   सफल लोकशाही के लिए मतदाता का भी परिपक्व होना जरूरी हैं थोड़े से लालच में अपना बहुमूल्य मत को बेच कर पांच सालों तक अन्याय सहना ये नासमजी की निशानी ही हैं।

    कहीं पढ़ा था,एक महिला बीच सड़क छाता लहराती मस्ती से चल रही थी और खुद लोकशाही में जी रही थी उसका प्रमाण दे रही थी, किसी ने टोका भी कि वहां तो गाडियां चलती हैं उसे फुटपाथ पर ही चलना चाहिए किंतु वह टस से मस नहीं होते हुए वही चलती रही।ये क्या सही में लोकशाही हैं। नहीं लोकशाही में तुम्हारे जितने हक हैं वह दूसरों के भी हैं,अपना हक लेने के समय दूसरे के हक का भी ध्यान रखना चाहिए,बीच सड़क चलके तुम दूसरों के हक को नहीं मार सकते।

  आधी रात को जोर जोर से गाना बजाना तुम्हार हक हैं किंतु आपके पड़ोसियों को भी आराम से सोने का हक़ हैं।अनुकूलन के साथ रहना लोकशाही में अनिवार्य हैं।

    प्लूटो ने लोकशाही का विरोध इस आधार पर किया कि–अगर लोगो में नैतिकता और बौद्धिक शक्ति नहीं हो तो लोकशाही टिक नहीं सकती।लोकशाही फिर भी पूंजीवाद और तानाशाही से अच्छी कही जायेगी।

 संविधान  ही लोकशाही की गीता हैं,संविधान में प्रत्येक जाति और धर्म को एक सरीखे  कानून से न्याय दिया जाना चाहिए जैसे घर में सब को एक जैसे ही हक होते हैं।

  लोकशाही की नीव मजबूत करने के लिए देश भक्ति अति आवश्यक हैं ।अपनी जाति,धर्म या दल के निहित स्वार्थ के लिए देश का नुकसान हो ऐसे कार्य,वक्तव्य आदि किसी दल या व्यक्ति  को नहीं  करना चाहिए।जिससे देश का सम्मान दुनियां में कम हो जाए ,देश के दुश्मन बढ़ जाएं ऐसे वक्तव्य और भाषण से नेताओं को भी बचना चाहिए।देश से बढ़कर कोई स्वार्थ को नहीं मानना चाहिए।

स्वतंत्रता ऐसी हो जिसमे सब सामान,

देश से उपर न हो किसी का निजी सम्मान।

जयश्री बिरमी

सेवा निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद


Related Posts

Aaj ravan jalaya jayega by shiddharth gorakhpuri

October 23, 2021

 आज रावण जलाया जाएगा दशहरा है आज, आज रावण जलाया जाएगा। राम को अच्छा और रावण को बुरा बताया जाएगा।

Putle palatwar nhi karte by Jitendra Kabir

October 23, 2021

पुतले पलटवार नहीं करते बुराई का पुतला बना, उसको जलाकर, अपने झूठे अहम की तुष्टि कर लेना आसान है, इसलिए

Humme ram ravan bhi by Anita Sharma

October 23, 2021

 “हममें राम रावण भी” राम-रावण कोई मनुज नहीं वे तो मन के कारक हैं। उच्च विचारों की शृंखला राम के

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

October 23, 2021

 विजयादशमी के शुभ अवसर पर  माँ की शरण  मैया तू ही सहारा है विघ्न -बाधा हरती है। आते जो तेरे

Suvidha by Jitendra Kabir

October 23, 2021

 सुविधा सुनो स्त्री! जिनके लिए सुविधा  हो तुम… पूरे परिवार को खाना पकाने व खिलाने की, घर के अंदर-बाहर साफ-सफाई

Durga shakti bhavani by Dr. indu kumari

October 23, 2021

 शीर्षक-दुर्गा शक्ति भवानी माँ मुझे भक्ति दो वरदान हम तुम्हारे बच्चे है नादान रक्षा करने वाली होती माँ सच्ची राह

Leave a Comment