Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Lo phir se likh deti hun by vijay Lakshmi Pandey

 लो फिर  से  लिख  देती  हूँ !! लो  फिर  से  लिख  देती  हूँ , अपनीं      प्रेम      …


 लो फिर  से  लिख  देती  हूँ !!

Lo phir se likh deti hun by vijay Lakshmi Pandey

लो  फिर  से  लिख  देती  हूँ ,

अपनीं      प्रेम      कहानी  ।

बरस  रहे हैं सजल  नेत्र  ये,

ज्यों   सावन    का   पानी ।।

यह जो प्रेम की मधुरिम पीड़ा,

टीस    बनी   है     चुभती  ।

कैसे  समझाऊँ  मैं    तुमको ,

भाग   मर्म     के     बुनती ।।

सारे    लहज़े  वही  पुराने ,

मुझे   आज    भी    भाते ।

चंदा  की  हो  चटख चाँदनी,

या    मधुकर    के   गानें ।।

बीते  पल  समेट  कर  लाऊँ,

यह     कैसे    है    सम्भव  ।

मौन  हो  गए  सारे  किस्से ,

बासी     पन्नों   के  तह  में ।।

उन  बासी  पन्नों  के तह में,

सूखा       एक     गुलाब  ।

ऐसे दिखा  मुझे  वह  जैसे,

खोया      मीत    मिला  ।।

आह !  वेदना    पराकाष्ठा,

किसको   आज  सुनाऊँ  ।

एक  हाथ से अश्रु सुखाकर,

फिर    से   पुष्प  छिपाऊँ ।।

तुम्हें  छुपाया  है पन्नों   में ,

तुम  भी  राग  छुपा   लो ।

और कहीं तन्हा में जाकर,

दिल  से “विजय” लगा लो।।

लो सम्भाल लो  मीठी बातें,

कटुक    निबौरी   दे     दो ।

मरहम सी कड़वाहट जिसकी,

शायद     जीवन    दे    दे ।।

इस जीवन के तह खानें से,

कितनें     तानें    लिक्खे ।

कम पड़ जाये कागद स्याही,

खुल  जाएँ   जो  फिर  से ।।

लो फिर  से  लिख  देती   हूँ,

अपनीं      प्रेम      कहानी ।

बरस  रहें  हैं  सजल नेत्र ये,

ज्यों   सावन   का  पानी  ।।

               विजय  लक्ष्मी  पाण्डेय
               एम.ए., बी.एड.(हिन्दी)
                स्वरचित  मौलिक रचना
                        आजमगढ़ ,उत्तर प्रदेश


Related Posts

अब भी हिम्मत बाकी है!

August 5, 2022

अब भी हिम्मत बाकी है! मुसीबतों का भंडार है,हर तकलीफ का संहार है,अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,दृढ़ता तेरा

जाने के बाद।

August 5, 2022

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना।

मन मेरा पुकारे…….

August 5, 2022

मन मेरा पुकारे……. मन मेरा पुकारे काना प्यारेकहाँ है ढिकाना हमको बता देकरनी है बातें तुझ से कब से हम

शीर्षक : लड़की और समाज

August 5, 2022

शीर्षक : लड़की और समाज लड़की का जीवनसिमटकर रह जाता है ,चौखट , चूल्हे , चौके तक । जन्म के

आज भी वो दिन हमको याद है

August 5, 2022

याद है वो दिन आज भी आज भी वो दिन हमको याद हैसर पर हमारे मोहब्बत ए ताज हैआज सीने

हजार है!/hazar hai

August 5, 2022

 हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है!

PreviousNext

Leave a Comment