Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Lekh by jayshree birmi

 लेख आज नेट पे पढ़ा कि अमेरिका के टेक्सास प्रांत के गेलवेस्टैन काउंटी के, जी. ओ. पी. काउंसील के सभ्य …


 लेख

Lekh by jayshree birmi

आज नेट पे पढ़ा कि अमेरिका के टेक्सास प्रांत के गेलवेस्टैन काउंटी के, जी. ओ. पी. काउंसील के सभ्य की  ४५  साल की उम्र में करोना से मौत हो गई।

ये महाशय मास्क और वैक्सीन के बारे में सोशल मीडिया में मजाक उड़ाते थे। क्या ऐसे लोगों को अन आज्ञाकारिता ( disobediency syndrome) की बीमारी होती हैं? जो भी नियम कानून हो उनका विरोध और उलंघन करना स्वभाव बन जाता हैं? लेकिन इन महाशय को नियमों का पालन न करना उनका मजाक उड़ाना महंगा पड़ा, जिंदगी से ही हाथ धोना पड़ गया।इतना गर्व अपने खयालों का , जो जरा भी वैज्ञानिक नहीं थे ,उसीसे जान गई उनकी। R. I. P.

कितनी नाससमझी थी इस बंदे में?जो दुनिया भर के वैज्ञानिक और डॉक्टर सिफारिशों अनदेखा,अनसुना  करते हुए  , उसे मूर्ख बता कर मजाक उड़ाना कितना वाजिब हैं? चलो वह खुद तो नहीं मानता था तो उसे खुद तक ही रखता,ना पहनता मास्क,न धोता हाथ बार बार,न लेता वैक्सिन किंतु सोशल मीडिया पर लिख दूसरे लोगो को पथभ्रष्ट करना कहा तक उचित है? कई लोग उसकी पोस्ट पढ़कर प्रभावित हुए होंगे।उन्होंने भी करोना नियमों का बहिष्कार किया होगा,वैक्सिन से दूर रहें होंगे।दो गज की आपस की दूरी छोड़ वैक्सिन से ही दूरी बना ली होगी।खुद तो  चल बसा किंतु कितने लोगो को अपने पीछे कतार में लगा गया वो तो रब ही जाने।

 क्या सोशल मीडिया को कोई नियम बना अवैधानिक माहितियों वाली खबरों को रोकना नहीं चाहिए! जिससे मानव जाति की सामाजिक,आर्थिक और स्वास्थ्य की होती हो।इतना बृहद प्रचलन वाले मीडिया की बहुत बड़ी  जिम्मेवारी  बनती हैं ये कि ऐसे लेख या विरोध वाले पोस्ट को खारिज करें।वैसे तो कई पोस्ट लॉक हो जाती हैं तो ऐसी वाली क्यों नहीं?

 वह तो चला गया किंतु बहुत सारे सवाल छोड़ गया हैं।मनुष्य  जो हरेक कार्य का विरोध कर अपनी आत्मश्लाघा को तो संतुष्ट करता है लेकिन साथ में कितने लोगो को खतरे में डालता हैं ये वह खुद भी नहीं जानता और अपने ही समाज में बुराई फैलता हैं।

उस देश में उल्टा सोचने वाले और अपने देश में       अज्ञान की वजह से लोग वैक्सिन नहीं ले रहे।अपने देश में भी बहुत अफवाहें फैली हैं,कोई कहता हैं ये आदमी को नपुसंक बना देगी,तो कोई धार्मिक आरोप लगा रहे हैं।और सब से उपर तो लोग राजनैतिक रोटियां सेक लेते हैं और उसे पार्टी विशेष की वैक्सिन बता बहिष्कार कर तो देते हैं फिर खुद तो टीका लगवा लेंगे किंतु जिसको पथभ्रष्ट किया वो लोग तो बेचारे करोना के शिकार हो ही जाएंगे।

कई गावों में तो टिके का हिंसात्मक  विरोध हुआ हैं ,स्वास्थ्य कर्मचारियों को घायल कर भागा दिया गया हैं तो कैसे पूरा करेंगे करोना काल का सफर?

 ऐसे हालातो में जरूरत हैं तो जन जागृति की जहां बात,जात देश और काल सब भूल सरकारों का साथ दें और ये जो राक्षसी केहर बरपा हैं उससे पार पाएं ।

जयश्री बिरमी

निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद


Related Posts

अब क्या कानून व्यवस्था बुलडोज़र के दम पर चलेगी

April 27, 2022

“अब क्या कानून व्यवस्था बुलडोज़र के दम पर चलेगी” देश के अहम मुद्दों से भटक रही सरकार धर्म और जात-पात

आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022

April 27, 2022

देश के नागरिकों को सुरक्षित कल की गारंटी देता है आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022 -सत्यवान ‘सौरभ’ आपराधिक प्रक्रिया (पहचान)

आकर्षण को प्यार समझने की भूल मत करो

April 25, 2022

 “आकर्षण को प्यार समझने की भूल मत करो” इश्क की आँधी बहा ले जाती है जिनको कच्ची उम्र के पड़ाव

उदास लड़के देखे है कभी

April 25, 2022

 “उदास लड़के देखे है कभी” उदास लड़कों के भीतर अंतर्द्वंद्व का दावानल भड़भड़ता रहता है, झाँका है कभी उदास बैठे

केसर के गुणों को आज़माईये

April 25, 2022

 “केसर के गुणों को आज़माईये” आजकल कभी न देखी, न सुनी ऐसी-ऐसी बीमारियाँ इंसानों के भीतर पनप रही है, जिसके

ज़िंदगी और कुछ भी नहीं”

April 25, 2022

 “ज़िंदगी और कुछ भी नहीं” “ज़िंदगी के कुछ किरदार ज़िंदगी को बहुत प्यारे होते है गुलाब से, कुछ अनमने मोगरे,

Leave a Comment