Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Laghukatha-Pizza| लघुकथा-पिज्जा

 लघुकथा-पिज्जा हाईवे पर बने विशाल फूड जोन में केवला को नौकरी मिल गई थी। बस, कोने में खड़े रहना था …


 लघुकथा-पिज्जा

Laghukatha-Pizza| लघुकथा-पिज्जा
हाईवे पर बने विशाल फूड जोन में केवला को नौकरी मिल गई थी। बस, कोने में खड़े रहना था और टेबल खाली होते ही उस पर पड़ी डिसें और नैपकिन सहित सारे कचरे को उठाकर डस्टबीन में डाल कर टेबल साफ करना था। पहले ही दिन महंगी गाड़ियों से आने वाले सुसंस्कृत लोगों को खाना खराब करते देख केवला को बहुत गुस्सा आया था, पर वहां वह कुछ कह नहीं सकता था।
घर में मर गए बेटे के नन्हे से बच्चे को सूखी रोटी और लहसुन की चटनी खिलाते समय वह यही सिखाता था कि भोजन भगवान है, इसलिए इसे चूर भर भी थाली में नहीं छोड़ना चाहिए। पर उस हिसाब से देखा जाए तो यहां तो सभी थोड़ा-थोड़ा भगवान को छोड़कर चले जाते हैं। टेबल साफ करते समय केवला माफी मांगते हुए कहता कि भगवान इन्हें माफ करना।
वहां खाने की चीजों के भाव अंग्रेजी में लिखे थे, इसलिए उसे पता नहीं चला कि कौन चीज कितने की है। पर जिस दिन उसे पता चला कि एक छोटी सी रोटी, जिस पर कुछ लगा होता है, लोग उसे पिज्जा कहते हैं, उसका भाव उसके एक सप्ताह के वेतन के बराबर है, उस दिन उसे सारी रात नींद नहीं आई थी।
रोज-रोज आने वालों तमाम लोग उस पिज्जा को खाते थे। खास कर छोटे बच्चे तो जिद कर के उसे मंगाते। जब भी केवला छोटे बच्चों को पिज्जा खाते देखता, उसे अपने पौत्र दीनू की याद आ जाती। बूढ़े केवला के दिल में एक युवा इच्छा जाग उठी कि एक दिन वह अपने दीनू को पिज्जा जरूर खिलाएगा।
साढ़े सात सौ में कितने दिन का राशन आ जाएग, यह सोच कर केवला पीछे हट जाता। पर एक दिन उसे लगा कि यहां रोजाना बच्चे खुशी खुशी पिज्जा खाते हैं तो उसके दीनू ने कौन सा गुनाह किया है?
केवला खुद्दार था, इसलिए वह पिज्जा मांग नहीं सकता था। आखिर उसने पूरे एक महीने दो घंटे अधिक काम कर के पिज्जा खरीद ही लिया। शाम को छुट्टी होने पर वह पिज्जा ले कर घर पहुंचा। डिब्बे में देना अच्छा नहीं लगा, इसलिए उसने टूटी-फूटी थाली में निकाल कर दीनू के आगे पिज्जा रख दिया। दीनू उसे प्यार से देखने लगा। केवला को लग रहा था कि पिज्जा मुंह में रखते ही दीनू उछल पड़ेगा। दीनू ने ऐसी रोटी पहली बार देखी थी। एक टुकड़ा तोड़कर मुंह में रख कर जोर से बोला, “दादा यह तो एकदम फीका है, थोड़ी लहसुन की चटनी दो न।”

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336



Related Posts

इतिहासबोध : राजनीति में महिला और महिला की राजनीति

October 19, 2023

इतिहासबोध : राजनीति में महिला और महिला की राजनीति ब्रिटेन में कैंब्रिज यानी विश्व प्रसिद्ध विद्याधाम। दुनिया को विज्ञान और

लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें

October 8, 2023

लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें बाॅस के एयरकंडीशन आफिस में घुसते ही तिवारी के चेहरे पर पसीना आ गया। डेस्क पर पड़ी

दुनिया का 68 अरब डालर का आर्ट बाजार

October 5, 2023

दुनिया का 68 अरब डालर का आर्ट बाजार सितंबर महीने में भारतीय कला जगत ने इतिहास रच दिया। अमृता शेरगिल

अनुराधा : कैसे दिन बीतें, कैसे बीती रतियां, पिया जाने न हाय…

September 21, 2023

सुपरहिट अनुराधा : कैसे दिन बीतें, कैसे बीती रतियां, पिया जाने न हाय… फ्रेंच साहित्य में यथार्थवाद के प्रणेता माने

दीवार और हाजी मस्तान | Diwar and Haji mastan

September 7, 2023

सुपरहिट  दीवार और हाजी मस्तान  आज खुश तो बहुत होगे तुम  अंडरवर्ल्ड पर फिल्में बनाने का चलन मूल तो हालीवुड

मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए जनाब

September 2, 2023

सुपरहिट मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी मिल जानी चाहिए जनाब आप ने न जाने कितनी बार अपने

Leave a Comment