Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Laghukatha-Mummy| लघुकथा-मम्मी

मम्मी किटी पार्टी जमी हुई थी। अचानक बच्चों की कहानियां कहने की बात चली तो मिसेज रावत ने कहा, “भई …


मम्मी

किटी पार्टी जमी हुई थी। अचानक बच्चों की कहानियां कहने की बात चली तो मिसेज रावत ने कहा, “भई कहानीवहानी तो हमें आती नहीं, फिर घर में दादा-दादी किस लिए हैं। इन लोगों से कुछ तो कराना ही चाहिए।”
यह सुन कर सभी महिलाएं हंस पड़ीं। तभी पीछे से किसी ने कहा, “कितनी आउटडेटेड बात है यह। आज के जमाने में भी कहीं कहानी कही जाती है।”
ज्यादातर महिलाओं के अनुसार यह बेकार का काम था। इतने में शहर के जाने-माने और संपन्न घर की बहू सुस्मिता ने कहा, “साॅरी, पर एक मदर के रूप में हमें यह काम करना ही चाहिए।”
यह बात सुस्मिता ने कही थी, इसलिए सभी उसकी बात को ध्यान सु सुनने लगीं। सुस्मिता ने आईपैड निकाल कर एक समाचार दिखाते हुए कहा, “पूरी दुनिया में एक नया ट्रेंड चल रहा है। मदर रोजाना रात को अपने छोटे बच्चों को एक कहानी सुनाती है, वह भी अपनी मातृभाषा में।साइकोलाॅजिस्ट का कहना है कि बच्चों के साथ इस तरह समय बिताने से आपकी बांडिंग बढ़ती है।”
थोड़ी देर पहले बोरिंग लगने वाली एक्टिविटी करने के लिए सभी तैयार हो गईं। श्रुति पहले से ही सुस्मिता से अभिभूत थी। घर जाते हुए रास्ते में ही उसने तय कर लिया था कि आज रात को वह बेटे ऋतुल को कहानी सुनाएगी। डिनर के बाद वह वह बेटे ऋतुल के बेडरूम में पहुंची। इस तरह अचानक रात को कमरे में मम्मी को देख कर ऋतुल हैरान रह गया। आते ही श्रुति ने कहा कि आज वह उसे एक कहानी सुनाएगी। ऋतुल यह सुन कर खुश हो गया कि बचपन से ही रोने पर उसे चुप कराने के लिए मोबाइल पकड़ाने वाली मम्मी आज उसे कहानी सुनाने आई है।
“एक बड़े फॉरेस्ट में एक टेरापीन एंड एक रैबिट बनी रहता था।” आगे की कहानी याद नहीं आई तो बात बदल दी कि एक ब्लैक कलर के रेवन को एक वेसल मिला। फिर…फिर उस वेसल में उसका फेस दिखाई दिया और फिर श्रुति यह बात भी भूल गई। थोड़ी देर में शेर की कहानी में गधा आ गया और सियार की जगह हिरन को अंगूर खट्टे लगे।
श्रुति को खुद पर दया और गुस्सा दोनों आया। पर हां, देर तक मोबाइल में सिर खपाने वाला ऋतुल उस रात अपनी मम्मी की गोद में सालों बाद गहरी नींद सो गया था।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

लघुकथा -मर्यादा |short story maryada

June 29, 2023

लघुकथा -मर्यादा | Short story maryada “उठो! लो फोन आया है।” “इतनी सुबह 5 बजे किसका फोन है यार?” नींद

लघुकथा पिज्जा | Short story pizza

June 29, 2023

लघुकथा पिज्जा | Short story pizza पिज्जा डिलिवरी ब्वाय की नौकरी करने वाले रघु को उसके अगल-बगल की झुग्गियों में

गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ| Parenting lesson in Gulzar’s ‘kitaab’

June 17, 2023

सुपरहिट:गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ 1977 में आई ‘किताब’ फिल्म में एक दृश्य है। फिल्म का ‘हीरो’ बाबला

क्लासिक :कहां से कहां जा सकती है जिंदगी| classic:where can life go from

June 17, 2023

क्लासिक:कहां से कहां जा सकती है जिंदगी जगजीत-चित्रा ऐसे लोग बहुत कम मिलेंगे, जिन्होंने विख्यात गजल गायक जगजीत-चित्रा का नाम

मुगल-ए-आजम की दूसरी अनारकली | Second Anarkali of Mughal-e-Azam

June 11, 2023

सुपरहिट:मुगल-ए-आजम की दूसरी अनारकली नियति कहें या संयोग, कभी-कभी अमुक घटनाएं एक-दूसरे पर इस तरह प्रभाव डालती हैं कि बाद

दास्तान-ए-तवायफ :नाच-गाना नहीं राष्ट्र के लिए गौरवगान कर चुकी वीरांगनाएं | Dastan-e-Tawaif

June 1, 2023

दास्तान-ए-तवायफ:नाच-गाना नहीं राष्ट्र के लिए गौरवगान कर चुकी वीरांगनाएं दास्तान-ए-तवायफ हम अक्सर जाने-अंजाने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को तो याद करते

PreviousNext

Leave a Comment