Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

story, कहानी

Laghukatha mere hisse ki dhoop by rupam

लघुकथा मेरे हिस्से की धूप तमाम तरह के बहस-मुबाहिसे होने के बाद भी उसका एक ही सवाल था- तो तुमने …


लघुकथा

मेरे हिस्से की धूप

Laghukatha mere hisse ki dhoop by rupam

तमाम तरह के बहस-मुबाहिसे होने के बाद भी उसका एक ही सवाल था- तो तुमने आखिरकार तय कर ही लिया ।

मैंने कहा – हां।

इस उलझन से अभी कहां उबर पाई थी कि मां का फोन आ गया। मैंने फ़ोन उठाया। उनका भी यही सवाल- कब आ रही ?? सवाल का जवाब तो मेरे पास पहले से ही था, लेकिन मैं न जाने क्यूं जवाब देने से कतरा रही थी। सोच रही थी चुप रह जाने पर शायद उनका सवाल बदल जाये।

लेकिन माँ के द्वारा खींची गई रेखा, लक्ष्मण रेखा से भी अधिक शक्तिशाली थी, उसे तोड़ना मेरे लिए मुश्किल भरा काम था। आखिरकार, जो जवाब वह चाह रही थी वह मिल गया और मैं घर आ गई । आने पर नाराजगी सबके चेहरे पर साफ-साफ झलक रही थी। जिसे मिटा पाना नामुमकिन था।

खैर, दस दिन बीत जाने पर मैंने अपने को दिनचर्या में ढालने की कोशिश की। फिर सुबह से शाम तक वही किताबें, नहीं तो दोस्तों से दो-चार बातें। आखिर घर है भाई- मर्यादा नाम की कोई चीज होती है- दोस्तों से भी बात करते हुए अगर किसी ने देख लिया, तो क्या बबाल होंगे, ये तो कोई नहीं जानता, ऊपर से सवालों की बौछार अलग।

तमाम क्रन्तिकारी विचारों को रखने वाले समाज में भी आप खुल कर किसी से कोई बात साझा नहीं कर सकते। ख़ैर, छोडिए इन बातों को। सब कुछ ठीक-ठाक चल ही रहा था कि एक दिन मन में अचानक स्वाभाविक सवाल पैदा होने लगा।…घर से शहर भेजना, शहर एक बड़ी यूनिवर्सिटी में पढ़ाना और तमाम खर्चे को उठाने के बाबजूद भी उसी समाज में खप जाने का उपदेश क्यों..? कुछ निर्णय लेने की स्वतंत्रता क्यों नहीं..? सवाल का उत्तर खोज ही रही थी कि पापा ने आवाज लगाई- अरे, कभी तो धूप में भी बैठ लिया करो। मां की फिर वही बात कि इतना कौन पढ़ता है?

बस मेरा क्या! मैं भी एक आधुनिक मशीन की तरह, जो अपनी हर संवेदना को नजरअंदाज करती है, बाहर निकली और धूप लेने लगी।

– रूपम 

बेगूसराय बिहार


Related Posts

Laghukatha mere hisse ki dhoop by rupam

June 12, 2021

लघुकथा मेरे हिस्से की धूप तमाम तरह के बहस-मुबाहिसे होने के बाद भी उसका एक ही सवाल था- तो तुमने

Laghukatha dar ke aage jeet hai by gaytri shukla

June 11, 2021

डर के आगे जीत है रिमझिम के दसवें जन्मदिन पर उसे नाना – नानी की ओर से उपहार में सायकल

laghukatha freedom the swatantrta by anuj saraswat

June 7, 2021

लघुकथा – फ्रीडम-द स्वतंत्रता “तू बेटा जा शहर जाकर नौकरी ढूंढ कब तक यहाँ ट्यूशन पढ़ाकर अपने को रोक मत

Nanhe jasoos bhognipur – story

January 22, 2021

 👉  नन्हे जासूस भोगनीपुर 👇    उन दिनों भोगनीपुर के समाचार पत्रों में ठगी किए उस विचित्र ढंग की खूब

Gramya yuva dal – story

January 12, 2021

 हेलो फ्रेंड्स अभी तक आपने धन श्याम किशोर की शहर से गांव में आने तक की कहानी और खेती करने

shikshit kisan – kahani

December 19, 2020

 शिक्षित किसान घनश्याम किशोर ही था, तभी उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। मां और भाई बहनों का पूरा

Leave a Comment