Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

story, कहानी

Laghukatha-dikhawati by kanchan shukla

 दिखावटी मिहिका के दिल में बहुत कसक है। शुरुआत में तो ज़्यादा ही होती थी। जब भी माँपिता से, इस …


 दिखावटी

Laghukatha-dikhawati by kanchan shukla

मिहिका के दिल में बहुत कसक है। शुरुआत में तो ज़्यादा ही होती थी। जब भी माँपिता से, इस बात का ज़िक्र किया। वे कहते,”हमें तुझ पर विश्वास है।”

उसके बाद, कुछ कहने की हिम्मत नही जुटा पाई। उसे लगता, उसके निर्णय से सभी नाराज़ थे, इसलिए ऐसा कह, बात टाल देते हैं। बार बार प्रश्न करने से भी, घबराती थी।

मिहिका ने अठारह साल में बीएससी जॉइन की। पढाई में मन नही लगा। तो डेढ़ साल बाद, अलग कोर्स करने की ललक। उसे अपने माँबाप से दूर, दूसरे शहर ले आई।

पैसे का इंतेज़ाम, रो गाकर ही हुआ। मिहिका के बाद, एक बेटा था। उसके लिए भी सोचना है। कई बार मिहिका ने, उनको कहते सुना था।

ग्यारह साल बाद, मिहिका के साथ साथ, घरवालों के रहन सहन में भी, ज़मीन आसमान का अंतर आया। उसने जितना कमाया, बहुत कुछ किया, घर की व्यवस्था सुधारने के लिए। औसत दर्जे से ऊपर लगता है घर अब। सब संसाधन मौजूद हैं।

मिहिका का पति, माधव अच्छा इंसान है। मिहिका के माँपिता, माधव को समझा रहे हैं,” हमारी बेटी का ख्याल रखना। अकेले मत छोड़ना। भरेपूरे परिवार में रही है। अकेलेपन से घबरा जाती है।”

मिहिका आश्चर्य से, दोनों को, पर्दे के पीछे से, देखती रहती है। इतने साल हो गए, फिर भी नही भूलता।

आज पहली बार मायके से ससुराल लौटना है। ये सब बातें, दिल में छुपी ग़मगीन यादों को, हवा दे रही हैं।

बेगाने शहर में वो कहाँ, कैसे, किन हालातों में, किसके साथ मैनेज करती है?? किसी ने कभी, जानने का प्रयास नही किया। ना कोई मिलने ही आया।

घर से आये थोड़े से पैसे। पार्टटाइम नौकरी के सहारे, अपनी पढ़ाई निपटाई। संघर्षों में, माधव पता नही कहाँ से आ गया। और जीवन की मुश्किलें सरल होती गईं।

माधव के सामने ऐसे दिखावटी व्यवहार और ऐसी समझाइश का सार समझ नही आया, मिहिका को।

मौलिक और स्वरचित
कंचन शुक्ला- अहमदाबाद


Related Posts

कहानी-जो करे सेवा उसे मिले मेवा

May 6, 2022

जो करे सेवा उसे मिले मेवा एक छोटा सा गांव था ,दो बेटों के साथ रेवती बहुत आराम से रह

कहानी-बेइन्तहाँ इश्क

May 2, 2022

 “बेइन्तहाँ इश्क” “तुम्हें देखते ही जानाँ खिलकर बहार हो जाऊँ, दूरियों पर बिरहन बन तेरे इंतज़ार में दर्द का पहाड़

कहानी – जड़ों में तेल देना इसे कहते हैं

May 1, 2022

कहानी-जड़ों में तेल देना इसे कहते हैं छोटे थे तब एक कहानी सुनी थी। एक भरापुरा परिवार था।दादा,दादी मां और

कहानी प्यार की

April 27, 2022

कहानी प्यार की सीमा और विमल के प्यार के चर्चे उनके पूरे ग्रुप में खूब थे।दो दिल एक जान थे

कहानी -वारसदार की महिमा

April 25, 2022

 “वारसदार की महिमा” आज ‘सनशाइन विला’ को स्वर्ग सा सजाया गया है, मेहमानों को दावत दी गई है, सबकुछ होते

कहानी – गुरु दक्षिणा

April 25, 2022

कहानी- “गुरु दक्षिणा” वृंदा ने अपने पति संजय से कहा सुनिए दिवाली आ रही है, अडोस-पड़ोस के सारे बच्चें नये

PreviousNext

Leave a Comment